आचार्य बालकृष्ण और योगगुरु स्वामी रामदेव / Handout
भारत की प्रमुख आयुर्वेद और वेलनेस संस्था, पतंजलि, दुनिया भर में रह रहे लाखों भारतीयों तक असली आयुर्वेदिक हेल्थकेयर पहुंचाने के लिए एक बड़े ग्लोबल विस्तार की शुरुआत कर रही है। जाने-माने आयुर्वेद विद्वान और संस्था के आध्यात्मिक व वैज्ञानिक प्रमुख, आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन में, पतंजलि अनौपचारिक प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूशन से हटकर एक व्यवस्थित और रेगुलेटेड ग्लोबल मौजूदगी की ओर बढ़ रही है।
'इंडिया अब्रॉड' के साथ एक खास बातचीत में, आचार्य बालकृष्ण ने एक ऐसे विजन के बारे में बताया जो कमर्शियल सफलता से कहीं आगे है और जिसका फोकस सांस्कृतिक जुड़ाव और सेहत पर है। उन्होंने 3.2 करोड़ (32 मिलियन) की भारतीय प्रवासी आबादी को संबोधित करते हुए कहा कि बहुत से लोग सालों से अपने सूटकेस में पतंजलि के प्रोडक्ट ले जाते रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने ग्लोबल मार्केट में ज्यादा प्रोफेशनल और कानूनी तौर पर जुड़ने की इच्छा जताई। इस बदलाव पर बात करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हम उस देश के नियमों और कानूनों के अनुसार सामान बेचना चाहते हैं। यह और भी बेहतर है। ज्यादा लोगों को फायदा होगा। हमें लोगों के लिए काम करने की और ऊर्जा मिलेगी।
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पतंजलि की ग्लोबल रणनीति के केंद्र में अत्याधुनिक वेलनेस सेंटर हैं, जिन्हें एक संपूर्ण आयुर्वेदिक अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है। ये सेंटर होलिस्टिक हीलिंग (संपूर्ण उपचार) के केंद्र के रूप में काम करेंगे, जहां पंचकर्म थेरेपी, योग की शिक्षा और संस्कृत सीखने की सुविधा मिलेगी।
आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि ये सेंटर स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के नियमों का सख्ती से पालन करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रैक्टिशनर अच्छी तरह से ट्रेंड और सर्टिफाइड हों। इन ग्लोबल सेंटर्स के मकसद पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ प्रोडक्ट बेचना नहीं है, बल्कि सेहत और खुशहाली का एक ऐसा पूरा सिस्टम देना है जहां लोग एक ही जगह पर आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पा सकें।
इस विस्तार के सबसे इनोवेटिव पहलुओं में से एक है पतंजलि का फ्री टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म, जिसका मकसद दुनिया भर के घरों तक एक्सपर्ट आयुर्वेदिक सलाह पहुंचाना है। यह सर्विस प्रवासियों को 24/7 डॉक्टरों से सलाह लेने की सुविधा देती है, जिससे उन्हें पारंपरिक भारतीय हेल्थकेयर से एक डिजिटल जुड़ाव मिलता है।
आचार्य बालकृष्ण ने इस सुविधा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस सिस्टम के जरिए, लोग हमारे डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं, योग पर गाइडेंस पा सकते हैं और फॉलो-अप केयर ले सकते हैं, चाहे वे कहीं भी रहते हों। हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए कर रहे हैं कि कोई भी आयुर्वेद के फायदों से वंचित न रहे।
बातचीत का एक बड़ा हिस्सा आयुर्वेद की वैज्ञानिक विश्वसनीयता पर केंद्रित था। पतंजलि ने अपने पारंपरिक फ़ॉर्मूलों को आधुनिक सबूतों के साथ साबित करने के लिए रिसर्च में भारी निवेश किया है और इंटरनेशनल जर्नल्स में सैकड़ों रिसर्च पेपर पब्लिश किए हैं।
आचार्य बालकृष्ण का मानना है कि यही ग्लोबल स्तर पर इसे स्वीकार किए जाने की कुंजी है। वे कहते हैं कि हम दुनिया को यह दिखाने के लिए कि आयुर्वेद एक गहरा और सही विज्ञान है, इन-विवो और इन-विट्रो स्टडीज सहित उच्चतम स्तर पर रिसर्च कर रहे हैं। जब हम इंटरनेशनल संस्थाओं के सामने अपना काम पेश करते हैं, तो वह डेटा और क्लिनिकल ट्रायल्स की मजबूती के साथ होता है।
विदेशों में रहने वाले भारतीयों की भावनात्मक और सांस्कृतिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, आचार्य बालकृष्ण का संदेश त्याग के बजाय सशक्तिकरण का था। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को अपने प्रोफ़ेशनल क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए रोजाना योग और आयुर्वेदिक तौर-तरीकों के ज़रिए अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने विदेशों में पारंपरिक तौर-तरीकों से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंतित लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि कोई पाबंदी नहीं है। कोई जोखिम नहीं है। कोई साइड-इफेक्ट नहीं है। आप सीख सकते हैं, सिखा सकते हैं और अभ्यास कर सकते हैं। इससे आपकी खुशी और सेहत में ही इजाफा होगा।
आचार्य बालकृष्ण ने इस बात पर जोर देते हुए अपनी बात खत्म की कि यह मिशन मानवता की सेवा है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से खुद को इस प्राचीन ज्ञान का एंबेसडर मानने का आग्रह किया और कहा कि अगर आप इन तौर-तरीकों के जरिए अपनी संस्कृति और सेहत से जुड़े रहते हैं, तो घर से हजारों मील दूर होने पर भी आप अपने दिल में अपनापन महसूस करेंगे। हम इस सफर में हर कदम पर आपका साथ देने के लिए यहां हैं।
वेलनेस सेंटर्स और डिजिटल हेल्थ की दिशा में इस सुनियोजित पहल के साथ, पतंजलि आयुर्वेद के स्वाभाविक प्रसार को एक औपचारिक और वैज्ञानिक रूप से समर्थित ग्लोबल आंदोलन में बदलने के लिए तैयार है।
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