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ऋषि सुनक और अक्षता मूर्ति वेनिस में इंडिया पवेलियन पहुंचे, कलाकृतियों को सराहा

दंपती ने मशहूर समकालीन कलाकारों की कृतियों को देखने-समझने में समय बिताया, जिनमें पारंपरिक तकनीकों और पहचान, घर व सशक्तिकरण जैसे आधुनिक विषयों के बीच के संबंध को उजागर किया गया था।

 ऋषि सुनक और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति  ऋषि सुनक और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति / Fb@Ministry of Culture, GoI

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति ने इटली के वेनिस में 61वीं इंटरनेशनल आर्ट एग्जिबिशन, 'ला बिएनाले डि वेनेजिया' (बिएनाले आर्टे 2026) में इंडिया पैविलियन का दौरा किया। ऐतिहासिक 'आर्सेनाले डि वेनेजिया' में बनी इस पैविलियन के दौरे के दौरान, इस जोड़े ने मशहूर समकालीन कलाकारों की कलाकृतियों को देखा। इन कलाकृतियों में पारंपरिक तकनीकों और पहचान, घर व सशक्तिकरण जैसे आधुनिक विषयों के बीच के संबंध को दिखाया गया था।

इस प्रदर्शनी की तारीफ करते हुए सुनक ने कहा कि वेनिस बिएनाले के इंडिया पैविलियन में आकर बहुत अच्छा लग रहा है। यहां कला के बेहतरीन नमूने मौजूद हैं जो आज भारत में मौजूद हुनर ​​को दिखाते हैं।

 सुनक ने कहा कि हम दोनों को सुमाक्षी (सिंह) की यह कलाकृति बहुत पसंद है, जिसके बीच में हम अभी खड़े हैं। इसकी वजह है इसमें की गई कढ़ाई और 'घर से दूर एक और घर' (home from home) और महिलाओं के सशक्तिकरण का विचार। लेकिन यहां पसंद करने के लिए और भी बहुत कुछ है।

मूर्ति, जिन्होंने पहले इंडिया आर्ट फेयर में इस कॉन्सेप्ट की झलक देखी थी, ने फाइनल इंस्टॉलेशन को असल रूप में देखकर अपनी खुशी जाहिर की और कहा कि यहां आना बहुत खास है। मैंने इंडिया आर्ट फेयर में सुमाक्षी को बोलते हुए सुना था और देखा था कि यह कैसा दिखेगा। अब बिएनाले में इसे असल में देखना अद्भुत है। कढ़ाई जैसी तकनीकी कला के जरिए 'घर' के कॉन्सेप्ट को इतनी खूबसूरत और नाज़ुक तरह से पेश किया गया है, जिसे देखना बहुत अच्छा लगता है।



इस जोड़े ने कर्नाटक की कलाकार रंजनी शेट्टार के काम की भी खास तौर पर तारीफ की। मूर्ति ने शेट्टार की कलाकृति को देखकर गर्व महसूस किया, जिसमें फूलों और भारतीय संस्कृति में उनके महत्व को दिखाया गया है। उन्होंने इसे तकनीकी रूप से बेहतरीन कलाकृति बताया। उन्होंने प्रदर्शनी के मुख्य विषय पर भी बात की और बताया कि कैसे इस कलेक्शन में मिट्टी को उस चीज के तौर पर इस्तेमाल किया गया है जो हमारे अस्तित्व का आधार है।

सात साल के अंतराल के बाद प्रतिष्ठित बिएनाले आर्टे (Biennale Arte) में भारत की भागीदारी देश की सांस्कृतिक कूटनीति में एक अहम कदम है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित इस प्रयास में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), ललित कला अकादमी और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान शामिल हैं। साथ ही, नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) और सेरेंडिपिटी आर्ट्स फाउंडेशन जैसे सहयोगी पार्टनर भी इसमें शामिल हैं।

इस पैविलियन में साकारमा सोनम ताशी, अलवर बालासुब्रमण्यम, रंजनी शेट्टार, सुमाक्षी सिंह और आसिम वकिफ की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। बिएनाले के मुख्य विषय 'इन माइनर कीज' (In Minor Keys) के जवाब में, यह प्रदर्शनी समकालीन भारतीय नजरिए से यादों, पहचान, अपनापन और सांस्कृतिक निरंतरता जैसे विषयों को पेश करती है।

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