अर्शदीप सिंह डांग / RAF
भारतीय मूल के अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शदीप सिंह डांग ने रॉयल एयर फोर्स (RAF) से फाइटर पायलट के तौर पर ट्रेनिंग पूरी की है। इसके साथ ही, वे दूसरे विश्व युद्ध के बाद UK में फास्ट-जेट विंग्स हासिल करने वाले पहले सिख बन गए हैं। 28 साल के अर्शदीप को 14 अगस्त को नॉर्थ वेल्स में RAF वैली में हुई फास्ट-जेट पायलट ग्रेजुएशन सेरेमनी के दौरान फाइटर विंग्स मिले।
RAF ने बताया कि वे UK मिलिट्री फ्लाइंग ट्रेनिंग सिस्टम के तहत 4 फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल में टेक्सन एयरक्फ्ट पर ट्रेनिंग पूरी करने वाले पहले सिख ट्रेनी थे, हालांकि वे बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी करने वाले पहले सिख नहीं थे। RAF ने कहा कि फ्लाइट लेफ्टिनेंट डांग की यह कामयाबी फास्ट-जेट कम्युनिटी में प्रतिनिधित्व और विविधता की दिशा में एक अहम कदम है।
डांग के परिवार की जड़ें पंजाब में हैं।
Many congratulations to Flight Lieutenant Arshdeep Singh Dang on earning his RAF fighter pilot wings — continuing the proud legacy of Sikh fighter pilots who have served with distinction for generations. A historic and inspiring achievement. pic.twitter.com/qqV3DzaanQ
— SikhMilitaryFoundation (@SikhMilitaryFdn) August 16, 2026
ब्रिटिश सेना के साथ उड़ान भरने वाले सिख पायलटों की बहादुरी का एक लंबा इतिहास रहा है। इसकी शुरुआत हरदित सिंह मलिक से हुई, जो पहले भारतीय मूल के कॉम्बैट पायलट बने। उन्होंने अपनी पगड़ी उतारने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय एक खास तरह का फ्लाइंग हेलमेट पहना था।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, स्क्वाड्रन लीडर मोहिंदर सिंह पुज्जी जैसे नायकों ने यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और बर्मा में अपने कॉम्बैट मिशन के लिए 'डिस्टिंग्विश्ड फ्लाइंग क्रॉस' हासिल किया, जबकि फ्लाइंग ऑफिसर मनमोहन सिंह ने मैरीटाइम पेट्रोल पायलट के तौर पर अहम योगदान दिया।
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