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4 अगस्त की परीक्षा: क्या जीत पाएंगे प्रमिला जयपाल और श्री थानेदार?

कैनसस, मिशिगन, मिसौरी, वर्जीनिया और वॉशिंगटन में अगले सप्ताह होने वाले प्राइमरी चुनावों में कई भारतीय मूल के उम्मीदवार मैदान में हैं।

 क्षमा सावंत, प्रमिला जयपाल और श्री थानेदार क्षमा सावंत, प्रमिला जयपाल और श्री थानेदार / Handout

अमेरिका के पांच राज्यों कैनसस, मिशिगन, मिसौरी, वर्जीनिया और वॉशिंगटन में अगले सप्ताह होने वाले प्राइमरी चुनावों में कई भारतीय मूल के उम्मीदवार मैदान में हैं। इन राज्यों में 4 अगस्त को मतदान होगा जबकि मध्यावधि आम चुनाव 3 नवंबर 2026 को आयोजित किए जाएंगे।

वॉशिंगटन के नौवें संसदीय जिले में क्षमा सावंत की चुनौती

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की वॉशिंगटन के नौवें संसदीय जिले की सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार क्षमा सावंत लंबे समय से डेमोक्रेट सांसद रहे एडम स्मिथ को चुनौती दे रही हैं। स्वयं को स्वतंत्र समाजवादी बताने वाली सावंत इससे पहले एक दशक तक सिएटल सिटी काउंसिल में जिला 3 का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

साल 1973 में पुणे में जन्मी और मुंबई में पली-बढ़ीं क्षमा सावंत ने 1994 में मुंबई विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वह अमेरिका चली गईं, जहां उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। वर्ष 2013 में सिटी काउंसिल के लिए चुने जाने से पहले वह सिएटल सेंट्रल कम्युनिटी कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाती थीं और अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टीचर्स (लोकल 1789) की प्रतिनिधि के रूप में मार्टिन लूथर किंग काउंटी लेबर काउंसिल में भी सक्रिय रहीं।

4 अगस्त को होने वाले गैर-दलीय प्राइमरी चुनाव में उनके अलावा मौजूदा सांसद एडम स्मिथ, डगलस माइकल बेसलर, मेलिसा चौधरी और जैकब पेरासो भी मैदान में हैं।

प्रमिला जयपाल फिर मैदान में

भारतीय मूल की प्रमुख डेमोक्रेट सांसद प्रमिला जयपाल वॉशिंगटन के सातवें संसदीय जिले से दोबारा चुनाव लड़ रही हैं। उनका नाम भी 4 अगस्त को होने वाले प्राइमरी चुनाव के मतपत्र पर होगा।

प्रमिला जयपाल अमेरिकी कांग्रेस के लिए निर्वाचित होने वाली पहली भारतीय मूल की महिला हैं। वह वर्ष 2017 से सिएटल सहित वॉशिंगटन के सातवें संसदीय जिले का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इससे पहले वह 2015 से 2017 तक वॉशिंगटन राज्य विधानसभा के 37वें विधायी जिले की सदस्य थीं। राजनीति में आने से पहले वह सिएटल में नागरिक अधिकारों की सक्रिय कार्यकर्ता थीं।

इस गैर-दलीय प्राइमरी में उनके साथ ग्वेन किर्कलैंड (डेमोक्रेट), निरव शेठ (रिपब्लिकन) और डेविड ब्लॉमस्ट्रॉम (फिफ्थ रिपब्लिक पार्टी) भी चुनाव लड़ रहे हैं।

भारतीय मूल के निरव शेठ ने 2011 से 2014 तक अमेरिकी मरीन कॉर्प्स में सेवा दी। उन्होंने 2006 में भारत के गुजरात गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक स्टेट इंस्टीट्यूट से एसोसिएट डिग्री प्राप्त की। उनके पेशेवर अनुभव में विद्युत अभियंता, कंप्यूटर विज्ञान, विमान मैकेनिक, ऑटोमोबाइल सेवा सलाहकार और संपत्ति प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। वह 2024 में भी वॉशिंगटन के दसवें संसदीय जिले से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए प्राइमरी चुनाव लड़ चुके हैं।

जसनूर हंस भी चुनाव मैदान में

डेमोक्रेट उम्मीदवार जसनूर हंस दक्षिण किंग काउंटी स्थित वॉशिंगटन के 47वें विधानसभा जिले का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनाव लड़ रही हैं। वर्तमान में वह एक पारिवारिक कानून फर्म में कार्यरत हैं और इससे पहले विशेष शिक्षा के क्षेत्र में काम कर चुकी हैं।

अपने चुनाव अभियान के बारे में उन्होंने कहा कि इस जिले को आगे बढ़ाने वाले शिक्षक, घरेलू स्वास्थ्यकर्मी, छोटे व्यवसायी और अभिभावक ऐसी सरकार का इंतजार करते-करते थक चुके हैं, जो नुकसान हो जाने के बाद ही सामने आती है। यह काम करने का एक बेहतर तरीका है - सार्वजनिक धन वहीं खर्च किया जाए, जहां उससे लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव आए।

जसनूर हंस 4 अगस्त को होने वाले गैर-दलीय प्राइमरी चुनाव में मौजूदा डेमोक्रेट विधायक डेब्रा एंटेनमैन के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी। इसके बाद 3 नवंबर 2026 को आम चुनाव होगा।

बाजुन मावलवाला भी दौड़ में

डेमोक्रेट उम्मीदवार बाजुन मावलवाला वॉशिंगटन के पांचवें संसदीय जिले से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव लड़ रहे हैं। उनका नाम भी 4 अगस्त के प्राइमरी चुनाव के मतपत्र पर है।

मावलवाला के पिता बेहतर अवसरों की तलाश में किशोरावस्था में भारत से अमेरिका आए थे। कैलिफोर्निया में जन्मे मावलवाला ने 20 वर्षों तक अमेरिकी सेना में सेवा दी। अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने प्रवासियों के अधिकारों का समर्थन करते हुए कहा है कि वह "प्रवासियों को अपराधी बताने, उन पर कर नहीं देने या अवैध रूप से मतदान करने जैसे झूठे आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं।"

मिशिगन में श्री थानेदार के सामने कड़ी चुनौती

जनवरी 2023 से मिशिगन के 13वें संसदीय जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे डेमोक्रेट सांसद श्री थानेदार 4 अगस्त को होने वाले महत्वपूर्ण प्राइमरी चुनाव में दोबारा मैदान में हैं। उनका वर्तमान कार्यकाल 3 जनवरी 2027 तक है। इससे पहले वह 2021 से 2023 तक मिशिगन विधानसभा के तीसरे जिले का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

भारत में जन्मे थानेदार ने 1982 में यूनिवर्सिटी ऑफ एक्रॉन से डॉक्टरेट तथा 1988 में फॉन्टबोन विश्वविद्यालय से एमबीए किया। वह एक सफल उद्यमी हैं। उन्होंने केमिर एनालिटिकल सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य किया, एजोफार्मा कॉन्ट्रैक्ट फार्मास्यूटिकल सर्विसेज के अध्यक्ष रहे तथा एवोमीन एनालिटिकल सर्विसेज की स्थापना और सह-स्वामित्व भी किया। इसके अलावा वह मिशिगन विश्वविद्यालय में पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ता भी रह चुके हैं।

इस बार डेमोक्रेट प्राइमरी में उनके सामने मिशिगन के राज्य विधायक डोनावन मैकिनी चुनौती पेश कर रहे हैं और कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थानेदार को इस चुनाव में कड़ी टक्कर मिल सकती है।

अनिल कुमार आम चुनाव लड़ेंगे

अनिल कुमार, जो वर्तमान में वेन स्टेट यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य हैं, मिशिगन के 11वें संसदीय जिले से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

हालांकि उनका वर्तमान कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त होगा और वह दोबारा बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उन्होंने 3 नवंबर को होने वाले आम चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारी घोषित कर दी है। उनका नाम 4 अगस्त को होने वाले डेमोक्रेट प्राइमरी चुनाव के मतपत्र पर नहीं होगा।

सुहास सुब्रमण्यम सीधे आम चुनाव में

डेमोक्रेट सांसद सुहास सुब्रमण्यम, जो 2025 से वर्जीनिया के 10वें संसदीय जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट के लिए डेमोक्रेट प्राइमरी रद्द कर दी गई, जिसके बाद सुहास सुब्रमण्यम सीधे 3 नवंबर को होने वाले आम चुनाव में पहुंच गए हैं।

वह नवंबर 2024 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए थे और इसके साथ ही भारतीय मूल के सांसदों के अनौपचारिक समूह समोसा कॉकस के छठे सदस्य बने।

सुब्रमण्यम ने इतिहास रचते हुए वर्जीनिया ही नहीं, बल्कि पूरे अमेरिका के पूर्वी तट से कांग्रेस पहुंचने वाले पहले भारतीय मूल और पहले दक्षिण एशियाई सांसद बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने भगवद्गीता पर शपथ लेकर पद ग्रहण किया था।

इससे पहले वह 2019 में वर्जीनिया महासभा के लिए चुने गए थे। इसके अलावा उन्होंने ओबामा प्रशासन के दौरान व्हाइट हाउस में प्रौद्योगिकी नीति से जुड़े सलाहकार और विशेष सहायक के रूप में भी कार्य किया।

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