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विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा- यूरोप के साथ भारत का लगातार बढ़ रहा है जुड़ाव

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सहयोग बढ़ता है, वैसे-वैसे छोटे समूहों में संवाद भी जरूरी हो जाता है ताकि व्यापक दिशा को मजबूती मिल सके।

 भारत के विदेश मंत्री जयशंकर... भारत के विदेश मंत्री जयशंकर... / Twitter - @DrSJaishankar

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत-वीमर प्रारूप बैठक के बाद पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट और जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया।  

इस दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने वीमर प्रारूप बैठक के निमंत्रण के लिए फ्रांस के विदेश मंत्री बैरोट का आभार जताया और कहा कि मंत्री वाडेफुल और सिकोरस्की के साथ समय बिताकर विचार साझा करना उपयोगी रहा।

उन्होंने कहा कि आज कई मुद्दों पर संक्षिप्त लेकिन गहन और खुली चर्चा हुई। इससे पहले दोपहर में उनकी और मंत्री बैरोट की द्विपक्षीय बातचीत हुई। फ्रांस यूरोप में भारत का सबसे पुराना रणनीतिक साझेदार है, और दोनों देशों के संबंध बेहद खास हैं। द्विपक्षीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही राष्ट्रपति मैक्रॉन का भारत में स्वागत किया जाएगा।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि यह पहली बार है जब भारत इस प्रारूप में शामिल हुआ है। चर्चा मुख्य रूप से तीन विषयों पर केंद्रित रही, भारत-यूरोपीय संघ संबंध, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और यूक्रेन संघर्ष। यूरोप के साथ भारत का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है, जो ब्रुसेल्स के साथ सामूहिक प्रयासों और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के समर्थन से स्पष्ट है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सहयोग बढ़ता है, वैसे-वैसे छोटे समूहों में संवाद भी जरूरी हो जाता है ताकि व्यापक दिशा को मजबूती मिल सके। आज की बैठक इसी दिशा में एक प्रयास थी।

विदेश मंत्री ने आगे कहा कि दुनिया इस समय उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ वर्षों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में यह साफ दिखाई दिया है। यूरोप भी कई रणनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके अलावा, कुछ वैश्विक घटनाएं ऐसी हैं जो पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि भले ही हम दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हों, लेकिन इसी वजह से विचारों का नियमित आदान-प्रदान और साझा आकलन बेहद जरूरी हो जाता है।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यूरोपीय संघ और यूरोप के देशों के साथ संबंधों में सबसे अधिक विकास की संभावना है। इस क्षेत्र में अभी भी बहुत क्षमता मौजूद है और सहयोग के कई नए अवसर हैं। वीमर प्रारूप में शामिल तीनों यूरोपीय देश भारत के लिए महत्वपूर्ण भागीदार हैं। आज की चर्चा भारत-यूरोप संबंधों को नई ऊंचाई तक ले जाने में मददगार साबित होगी।

उन्होंने कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। जो घटनाएं दुनिया को अस्थिर और अनिश्चित बनाती हैं, वही समान सोच वाले देशों के बीच गहरे सहयोग की जरूरत को भी मजबूत करती हैं। यही सोच इस बैठक की आधारशिला रही है।

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