भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरीi / (Photo: IANS)
भारत सरकार ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। सरकार की ओर से 1 जुलाई को घोषणा की गई कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी का कार्यकाल, जो जुलाई के मध्य में खत्म होने वाला था, उसे एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने 1989 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी के कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।
मिसरी का मूल कार्यकाल 14 जुलाई, 2026 को खत्म हो रहा था, जिसे अब 14 जुलाई, 2027 तक या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) बढ़ा दिया गया है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी आदेश में 'फंडामेंटल रूल 56(d)' के प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया है।
मिसरी एक अनुभवी राजनयिक हैं जिन्हें अहम द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कामों का काफ़ी अनुभव है। 2024 में विदेश सचिव के तौर पर नियुक्ति के बाद से ही वे भारत की विदेश नीति को संभालने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनका कार्यकाल ऐसे समय में रहा है जब दुनिया में बड़े भू-राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं - जैसे पश्चिम एशिया और यूक्रेन में तनाव, इंडो-पैसिफिक में बदलते हालात, 'ग्लोबल साउथ' में भारत की मजबूत भूमिका, और चीन, पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ अहम संबंध।
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सूत्रों का कहना है कि यह कार्यकाल विस्तार मिसरी की लीडरशिप में सरकार के भरोसे और एक अहम दौर में भारत की विदेश नीति को आगे बढ़ाने में निरंतरता बनाए रखने की जरूरत को दिखाता है। मिसरी ने पाकिस्तान, यूरोप और अमेरिका में काम किया है और म्यांमार व चीन में राजदूत भी रहे हैं। उन्होंने अमेरिका, क्वाड देशों और यूरोपीय देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है, साथ ही जटिल आर्थिक कूटनीति और प्रवासी भारतीयों के कल्याण से जुड़े मुद्दों को भी संभाला है। संकट के समय - जैसे संघर्ष वाले इलाकों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालना और अहम रक्षा व टेक्नोलॉजी सहयोग को आगे बढ़ाना - उनकी सूझबूझ और स्थिर नेतृत्व की काफी तारीफ हुई है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत कई अहम राजनयिक कार्यक्रमों की तैयारी कर रहा है, जिनमें ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता के तहत होने वाले कार्यक्रम, G20 से जुड़े संभावित फॉलो-अप और द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन शामिल हैं।
मौजूदा सरकार के तहत वरिष्ठ अधिकारियों को कार्यकाल विस्तार मिलने का यह कोई पहला मामला नहीं है। सरकार ने अहम पदों के लिए अनुभवी लोगों पर ज़्यादा भरोसा दिखाया है, खासकर उन पदों के लिए जहाँ संस्थागत अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मामलों की गहरी समझ की जरूरत होती है। इस घटनाक्रम का राजनयिक समुदाय द्वारा स्वागत किए जाने की उम्मीद है, क्योंकि विदेश सेवा के शीर्ष स्तर पर निरंतरता से अक्सर नीतियों में अधिक स्थिरता आती है और भारत की वैश्विक पहुंच के बेहतर परिणाम मिलते हैं।
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