भारतीय-अमेरिकी समुदाय नेता अजय भुटोरिया। / Image- New India Abroad
व्हाइट हाउस के पूर्व कमिश्नर अजय जैन भुटोरिया ने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के उस नए प्रस्ताव की निंदा की है जिसमें H-1B वर्करों और कुछ अन्य कानूनी तौर पर रहने वाले गैर-आप्रवासियों (non-immigrants) को नौकरी खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रहने की इजाजत देने वाले 60 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म करने की बात कही गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस कदम से आप्रवासी परिवारों को भारी परेशानी होगी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बहुत कुशल टैलेंट का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
प्रस्तावित नियम, जिसकी अभी फेडरल ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) में समीक्षा हो रही है, उस अहम 60 दिन की मोहलत को खत्म कर सकता है जो नौकरी से निकाले गए विदेशी वर्करों को कानूनी तौर पर अमेरिका में रहते हुए नई नौकरी खोजने, वीजा स्टेटस ट्रांसफर करने या अपने गैर-आप्रवासी क्लासिफिकेशन में बदलाव करने की सुविधा देती है।
भुटोरिया ने एक बयान में कहा कि मैं DHS की इस प्रस्तावित पॉलिसी की कड़ी निंदा करता हूं और इसे गलत मानता हूं। उन्होंने जोर देकर कहा कि 60 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म करना अमानवीय और अव्यावहारिक है।
उन्होंने कहा कि जब किसी वर्कर की नौकरी अचानक खत्म हो जाती है, तो 60 दिन का समय पहले से ही बहुत कम होता है। इस सुरक्षा को पूरी तरह से खत्म करने से कानून का पालन करने वाले हजारों लोगों के पास अपनी जिंदगी को समेटने के लिए बिल्कुल भी समय नहीं बचेगा।
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उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नियम की वजह से, जिन परिवारों ने इस देश के लिए सालों तक कड़ी मेहनत की और टैक्स दिया है, वे रातों-रात उजड़ जाएंगे और बिना किसी गलती के मुश्किलों में घिर जाएंगे।
भुटोरिया ने कहा कि लोगों के पास अपने घर बेचने, लीज का इंतजाम करने या बच्चों का स्कूल बदलने का भी समय नहीं होगा। भुटोरिया पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के 'एशियन अमेरिकन्स, नेटिव हवाईअन्स और पैसिफिक आइलैंडर्स (AANHPI) पर सलाहकार आयोग' में काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने AANHPI समुदायों पर असर डालने वाली नीतियों के बारे में प्रशासन को सलाह दी थी।
भुटोरिया ने बताया कि मार्च 2023 में, व्हाइट हाउस AANHPI आयोग में काम करते हुए, उन्होंने एक अहम नीतिगत सुझाव पेश किया और आयोग से उसे मंजूरी दिलाई। इस सुझाव में DHS और USCIS से ग्रेस पीरियड (छूट की अवधि) को 60 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने की अपील की गई थी।
उन्होंने कहा कि उस सुझाव में कॉर्पोरेट हायरिंग के तरीकों की सच्चाई बताई गई थी, जहां टेक्निकल इंटरव्यू राउंड और वीजा ट्रांसफर के कागजी काम को पूरा होने में अक्सर महीनों लग जाते हैं, जो 60 दिन से कहीं ज्यादा समय है।
उन्होंने कहा कि DHS का नया प्रस्ताव दक्षिण एशियाई प्रवासी समुदाय और कुशल वर्कफोर्स (कामकाजी लोगों) की बुनियाद पर चोट करता है। उन्होंने DHS और प्रशासन से अपील की कि वे इस प्रस्ताव को तुरंत वापस लें और इसके बजाय "संवेदनशील और व्यावहारिक 180 दिन का ग्रेस पीरियड अपनाएं, जो मानवीय गरिमा का सम्मान करे और अमेरिका की प्रतिस्पर्धी बढ़त को बनाए रखे।
भुटोरिया ने दक्षिण एशियाई समुदाय के संगठनों, बिजनेस लीडर्स और वकालत करने वाले समूहों से अपील की कि जब यह नियम आधिकारिक तौर पर 'फेडरल रजिस्टर' में प्रकाशित हो, तो वे सार्वजनिक प्रतिक्रिया (public comments) के लिए तैयारी करें, ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्रशासन इस प्रस्ताव के पूरे असर को समझे।
भुटोरिया कानूनी आप्रवासन सुधारों, वर्कफोर्स डेवलपमेंट और आर्थिक अवसरों के जोरदार समर्थक रहे हैं। अपनी संघीय सेवा के अलावा, वे कैलिफोर्निया में नागरिक और सामुदायिक पहलों में भी सक्रिय रहे हैं और आप्रवासन, आर्थिक विकास और सार्वजनिक नीति से जुड़े मुद्दों पर काम करते रहे हैं।
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