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भारत और रूस ने विदेश कार्यालय परामर्श में रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की

विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में कहा, "भारत-रूस विदेश कार्यालय परामर्श सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूस के उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने की।"

 Indian and Russian officials Indian and Russian officials / Courtesy: X/@MEAIndia

भारत और रूस व‍िदेश मंत्रालय के बीच एक परामर्श बैठक आयोज‍ित हुई। इस दौरान उन्होंने अपनी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की और आपसी हितों से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूसी उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता की।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में कहा, "भारत-रूस विदेश कार्यालय परामर्श सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूस के उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने की।"

उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा की और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी दृष्टिकोण साझा किए।"

इससे पहले 17 मार्च को, भारत और रूस ने नई दिल्ली में 7वां संयुक्त राष्ट्र परामर्श आयोजित किया, जिसमें चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे। विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।

जायसवाल ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में कहा, "दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी प्राथमिकताओं का आदान-प्रदान किया। चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।"

इससे पहले 11 मार्च को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया संघर्ष तथा द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा की।

दो मंत्रियों के बीच यह बातचीत पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हुई, जो 28 फरवरी को संयुक्त अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ। इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनका लक्ष्य अमेरिका की संपत्तिया, क्षेत्रीय राजधानी और पश्चिम एशिया में सहयोगी बल थे।

बता दें कि‍ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दिसंबर में भारत का दो दिवसीय राज्य दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ औपचारिक वार्ता और भारत-रूस साझेदारी की स्थिति की समीक्षा की, जिसे रणनीतिक साझेदारी के रूप में नामित किए जाने को 25 साल हो गए हैं।

इस चर्चा के बाद 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसके दौरान दोनों पक्षों ने आने वाले वर्षों के लिए प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया। ऊर्जा, परमाणु शक्ति, व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी में सहयोग प्रमुख रूप से सामने आया।
 

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