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'दलाई लामा को ही अपना उत्तराधिकारी चुनने का अधिकार', बौद्ध धर्मगुरु के समर्थन में भारत

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तिब्बती बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक प्रमुख गुरु दलाई लामा (Dalai Lama) का अगला उत्तराधिकारी कौन होगा, इस पर अभी सस्पेंस है। इस बीच चीन के एक बयान को लेकर भारत ने तीखी टिप्पणी की है। भारत ने स्पष्ट तौर पर कहा की पवित्र बौद्ध धर्मगुरु और उनकी संस्था  गादेन फोडरंग ट्रस्ट को अपना उत्तराधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है। इसमें किसी बाह्य हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।  

भारत के संसदीय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बौद्ध धर्मगुरु के 90वें जन्मदिन से पहले उनके अगले उत्तराधिकारी चुनने के अधिकार का समर्थन दिया। उन्होंने इस हफ्ते एक बयान में कहा केवल दलाई लामा और उनके द्वारा स्थापित संगठन को ही उनके उत्तराधिकारी को तिब्बती बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक प्रमुख ( बौद्ध धर्मगुरु) को चुनने का अधिकार है। 

दरअसल, चीन ने दावा किया है कि उसे शाही विरासत के रूप में दलाई लामा के उत्तराधिकारी को मंजूरी देने का अधिकार मिला है।इस बीच किरेन रिजिजू ने जरूर जीन को दो टूक सुना दी लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय का दलाई लामा की उत्तराधिकार को लेकर अब तक कोई रिएक्शन नहीं आया है। 

भारतीय मीडिया के मुताबिक, भारत की केंद्रीय सरकार में मंत्री रिजिजू कहा, "किसी को भी हस्तक्षेप करने या यह तय करने का अधिकार नहीं है कि पवित्र दलाई लामा का उत्तराधिकारी कौन होगा...केवल उन्हें या उनकी संस्था को ही यह निर्णय लेने का अधिकार है। उनके अनुयायी इस बात पर गहराई से विश्वास करते हैं। दुनिया भर के शिष्यों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने उत्तराधिकार का निर्णय लें।"

बता दें कि रिजिजू बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। ऐसे में वे बौद्ध धर्मगुरु के जन्मदिवस पर वे  भारतीय अधिकारियों को साथ कार्यक्रम में शामिल होंगे। 

दलाई लामा का  6 जुलाई को धर्मगुरु के 90वां जन्मदिन है। ऐसे में रिजिजू का यह बयान धर्मगुरु के 90वें जन्मदिन से ठीक पहले आया है। बता दें कि धर्मगुरू लामा इससे पहले चीनी शासन के खिलाफ एक विद्रोह भी कर चुके हैं। बाद में उन्हें चीन छोड़कर वर्ष 1959 में भारत की शरण लेनी पड़ी थी। अपने 90वें जन्मदिन से पहले 2 जुलाई को दलाई लामा ने एक बयान जारी किया था। जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु के बाद उनका पुनर्जन्म अगले आध्यात्मिक नेता के रूप में होगा और उनका उत्तराधिकारी वही होगा जिसका जन्म चीन के बाहर हुआ हो। उन्होंने आगे कहा कि केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट ही सक्सेसर की पहचान करेगा। 

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