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भारत के विदेश मंत्री जयशंकर जाएंगे मॉरिशस और यूएई, दौरा 9 अप्रैल से

मॉरिशस में विदेश मंत्री जयशंकर 9वें इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस (हिंद महासागर सम्मेलन) में शामिल होंगे और मॉरिशस के शीर्ष नेतृत्व से मिलकर द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे।

 भारत के विदेश मंत्री जयशंकर भारत के विदेश मंत्री जयशंकर / Reuters

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर 9-12 अप्रैल के बीच दो देशों के दौरे पर रहेंगे। पहले वो मॉरिशस और फिर यूएई जाएंगे। भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।  

मॉरिशस में विदेश मंत्री जयशंकर 9वें इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस (हिंद महासागर सम्मेलन) में शामिल होंगे और मॉरिशस के शीर्ष नेतृत्व से मिलकर द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार एस जयशंकर इस सम्मेलन को संबोधित करेंगे, साथ ही विभिन्न देशों के अपने समकक्षों संग मुलाकात और वार्ता करेंगे। ये सम्मेलन भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी, विजन महासागर और ग्लोबल साउथ के प्रति संकल्प को दर्शाता है।

इसके बाद, 11 अप्रैल से विदेश मंत्री यूएई के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रवाना होंगे। यहां भी शीर्ष नेतृत्व से मिल दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग की समीक्षा करेंगे ताकि कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप (व्यापक रणनीतिक साझेदारी) को और मजबूत किया जा सके।

यह सम्मेलन मॉरिशस सरकार और विदेश मंत्रालय के सहयोग से नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का मुख्य विषय “हिंद महासागर के सुशासन के लिए सामूहिक जिम्मेदारी” रखा गया है। इसका आयोजन 10-12 अप्रैल तक होगा।

2016 से ही इसका आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना, समुद्री व्यापार को सुदृढ़ करना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन संबंधित प्रभाव से निपटना और समुद्री संसाधनों के संरक्षण के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करना है।

इंडिया फाउंडेशन के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में यह सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के लिए साझा मुद्दों पर विचार-विमर्श का एक प्रमुख मंच बन चुका है। यह सम्मेलन क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करने हेतु साझेदार देशों को एक साझा मंच पर लाने का कार्य करता रहा है।

विदेश मंत्री जयशंकर के यूएई दौरे की घोषणा यूएस और ईरान के दो हफ्ते के संघर्षविराम पर सहमति बनने के कुछ ही घंटों बाद हुई।

एक बयान में, एमईए ने दोहराया कि संघर्ष को खत्म करने के लिए डायलॉग और डिप्लोमेसी (संवाद और कूटनीति) जरूरी हैं। इसमें कहा गया कि पश्चिम एशिया संघर्ष ने लोगों को तकलीफ दी है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान पैदा किया है।

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