संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी पी हरीश। / Courtesy photo
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को शामिल करने के लिए इसके विस्तार की मांग को अमेरिकी कांग्रेस में फिर से समर्थन मिला है। सांसदों का तर्क है कि इस संस्था का मौजूदा पावर स्ट्रक्चर आज की जियोपॉलिटिकल हकीकत को नहीं दिखाता।
बुधवार (स्थानीय समय) को संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर 'हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी' की सुनवाई के दौरान, प्रतिनिधि एमी बेरा ने कहा कि संगठन में किसी भी सार्थक बदलाव के लिए सुरक्षा परिषद के गठन पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने स्थायी सदस्यता के लिए जिन देशों पर विचार किया जाना चाहिए, उनमें खास तौर पर भारत का नाम लिया।
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बेरा ने कहा कि अगर हम आज की दुनिया को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र का ढांचा तैयार करते, तो हम इसे बिल्कुल अलग तरह से बनाते। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता आज भी 1945 की दुनिया की तस्वीर दिखाती है। बेरा ने G4 देशों- ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान को शामिल करके सुरक्षा परिषद का विस्तार करने के प्रस्तावों का जिक्र किया।
ये बातें 'संयुक्त राष्ट्र जवाबदेही और सुधार: रणनीतिक कूटनीति और जिम्मेदारी साझा करने के जरिए 'अमेरिका फर्स्ट' विदेश नीति को आगे बढ़ाना' विषय पर हुई सुनवाई के दौरान कही गईं। इस सुनवाई में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज और यू.एन. प्रबंधन और सुधार के लिए राजदूत जेफरी बार्टोस ने यू.एन. सिस्टम में बदलाव लाने के लिए ट्रंप प्रशासन की कोशिशों का बचाव किया।
बेरा के सवाल का जवाब देते हुए, वाल्ट्ज ने माना कि सुरक्षा परिषद अब आज की वैश्विक हकीकत को नहीं दिखाती है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इसमें सुधार करना राजनीतिक रूप से मुश्किल है।
वाल्ट्ज ने P5- यानी पांच स्थायी सदस्यों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन) का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे इस बात की चिंता है कि P5 आज की दुनिया की तस्वीर पेश नहीं करते हैं।
उन्होंने कहा कि और ज्यादा चुने हुए सदस्य रखने के प्रस्ताव आए हैं। कुछ स्थायी सदस्य बनाने लेकिन वीटो का अधिकार न देने के प्रस्ताव भी आए हैं। सुरक्षा परिषद में सुधार के मामले में सचमुच बहुत अलग-अलग तरह के विचार सामने आए हैं।
बार्टोस ने पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी मिशन द्वारा किए गए सफल मैनेजमेंट सुधारों का जिक्र किया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र की बजट बनाने की प्रक्रियाओं में बदलाव भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सालों की नाकाम कोशिशों के बाद, अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के क्रेडिट सिस्टम में सुधार के लिए दूसरे सदस्य देशों के साथ मिलकर काम किया है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और उसमें स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। उसका तर्क है कि इस संस्था का मौजूदा ढांचा अब आज की भू-राजनीतिक हकीकत को नहीं दिखाता है।
नई दिल्ली का कहना है कि उसकी योग्यताएं- जैसे दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होना, सबसे बड़ा लोकतंत्र होना, एक बड़ी अर्थव्यवस्था होना और शांति बनाए रखने के अभियानों में संयुक्त राष्ट्र को सबसे ज्यादा योगदान देने वालों में से एक होना उसे स्थायी सीट का हकदार बनाती हैं।
भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ G4 समूह का हिस्सा है, जो सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी, दोनों तरह की सीटों की संख्या बढ़ाने की वकालत करता है।
संयुक्त राष्ट्र के कई सदस्य देशों से व्यापक समर्थन मिलने के बावजूद, कुछ देशों के विरोध और सुधार के ढांचे पर मौजूदा स्थायी सदस्यों के बीच आम सहमति न बन पाने के कारण बातचीत सालों से अटकी हुई है।
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