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खालिदा जिया: अविभाजित भारत से बांग्लादेश की पहली महिला पीएम तक का सफर

खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश की राजनीति के एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

 खालिदा जिया (फाइल फोटो) खालिदा जिया (फाइल फोटो) / X/@bdbnp78

बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में शुमार और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया का 30 दिसंबर की सुबह लंबी बीमारी के बाद 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। करीब चार दशकों तक बांग्लादेश की राजनीति को दिशा देने वाली खालिदा जिया तीन बार प्रधानमंत्री रहीं और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन के रूप में उन्होंने लंबा नेतृत्व किया।

खालिदा जिया का जन्म 1945 में अविभाजित भारत के जलपाईगुड़ी (ग्रेटर दिनाजपुर क्षेत्र) में हुआ था। भारत विभाजन के बाद उनका परिवार तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान चला गया। वर्ष 1960 में उनका विवाह जियाउर रहमान से हुआ, जो उस समय पाकिस्तानी सेना में कप्तान थे। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में जियाउर रहमान ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ विद्रोह किया और बाद में 1977 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने। उन्होंने 1978 में BNP की स्थापना की।

30 मई 1981 को जियाउर रहमान की हत्या के बाद BNP गंभीर संकट में आ गई। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के आग्रह पर खालिदा जिया राजनीति में सक्रिय हुईं। जनवरी 1984 में वे BNP की उपाध्यक्ष बनीं और उसी वर्ष मई में पार्टी की चेयरपर्सन चुनी गईं। इसके बाद 1993, 2009 और 2016 में भी वे इस पद पर बनी रहीं, जिससे उनका करीब 41 साल का नेतृत्व स्थापित हुआ।

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1991 के संसदीय चुनाव में BNP की जीत के बाद खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। इसके बाद उन्होंने 1996 और 2001 में भी प्रधानमंत्री पद संभाला। उनका कार्यकाल भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में माना जाता है। उन्होंने भारत के साथ ट्रांजिट और कनेक्टिविटी के मुद्दों का कड़ा विरोध किया और कहा कि इससे बांग्लादेश की संप्रभुता को खतरा है। भारत को बांग्लादेश के रास्ते पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच देने को उन्होंने “गुलामी” तक करार दिया।

खालिदा जिया ने 1972 की भारत-बांग्लादेश मैत्री संधि के नवीनीकरण का भी विरोध किया और फरक्का बैराज को लेकर भारत पर बांग्लादेश के पानी के अधिकार छीनने का आरोप लगाया। 2002 में चीन के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के उनके फैसले से भी भारत के साथ तनाव और गहरा गया। भारत ने उनके कार्यकाल में बांग्लादेश पर पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी संगठनों को पनाह देने के आरोप लगाए।

बांग्लादेश की राजनीति में तीन दशकों से अधिक समय तक दो महिलाओं—खालिदा जिया और शेख हसीना—का दबदबा रहा। 2009 में शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद खालिदा जिया ने खुद को लोकतंत्र की लड़ाई का प्रतीक बताया। आंदोलनों के दौरान उन्हें कई बार नजरबंद किया गया और 2011 में अमेरिका के न्यू जर्सी स्टेट सीनेट ने उन्हें “फाइटर फॉर डेमोक्रेसी” के सम्मान से नवाजा।

2018 में खालिदा जिया को भ्रष्टाचार के एक मामले में पांच साल की सजा सुनाई गई थी। कोविड-19 के दौरान 2020 में उनकी सजा निलंबित कर दी गई और अगस्त 2024 में राष्ट्रपति के आदेश से उन्हें पूरी तरह रिहा कर दिया गया। इलाज के लिए वे लंदन गईं और मई 2025 में ढाका लौटीं।

नवंबर में दिल और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 30 दिसंबर को उनका निधन हो गया। वे अपने बड़े बेटे और BNP के कार्यवाहक चेयरमैन तारिक रहमान, उनकी पत्नी जुबैदा रहमान और पोती जाइमा रहमान को पीछे छोड़ गई हैं। तारिक रहमान 17 साल के आत्मनिर्वासन के बाद 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे थे।

 

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