मोदी और ट्रंप। / REUTERS/Kevin Lamarque/File
व्हाइट हाउस ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद और अमेरिका की ओर से प्रस्तावित ऊंचे टैरिफ के मुद्दे पर आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालेंगे।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान नवारो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री के बीच बहुत अच्छे कार्य संबंध हैं। वे इस मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। इस मामले में उनके बीच आकर टिप्पणी करना मेरा काम नहीं है।
नवारो एक सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम से जुड़े एक विधेयक का उल्लेख किया गया था। इस विधेयक के तहत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। पत्रकार ने पूछा था कि प्रस्तावित टैरिफ और जारी व्यापार वार्ताओं के बीच क्या इससे भारत-अमेरिका संबंधों पर और दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, नवारो ने संभावित टैरिफ पर सीधे कोई जवाब नहीं दिया। इसके बजाय उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स में कुछ महीने पहले लिखे गए अपने एक लेख का जिक्र किया, जो भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार से संबंधित था।
यह भी पढ़ें: भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग, नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में दिया न्योता
उन्होंने कहा कि अपने लेख में उन्होंने तर्क दिया था कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में काफी बढ़ोतरी हुई। नवारो ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस के तेल व्यापार में ज्यादा शामिल नहीं था, लेकिन उसके बाद उसकी भागीदारी काफी बढ़ गई।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि भारत रूसी तेल से जुड़े उत्पादों की बिक्री कर रहा है और इस व्यापार से रूस को युद्ध जारी रखने के लिए आर्थिक मदद मिली है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आंकड़ा पेश नहीं किया।
नवारो ने कहा कि यह मुद्दा अब सुलझ चुका है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस कार्रवाई के बाद यह समस्या समाप्त हुई या वह भारत की तेल खरीद, पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री या व्यापार के किसी अन्य पहलू की बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अब हल हो चुका है। हो सकता है कि मेरे उस लेख की भी इसमें कुछ भूमिका रही हो। नवारो की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापार संबंधी बातचीत जारी है।
इससे पहले उन्होंने ट्रंप प्रशासन की व्यापक टैरिफ नीति का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि टैरिफ के कारण विदेशी कंपनियां अमेरिका में कारखाने स्थापित कर रही हैं और इससे घरेलू निवेश को भी बढ़ावा मिल रहा है।
नवारो ने कहा कि टैरिफ की वजह से विदेशी निवेशक टैरिफ से बचने के लिए अमेरिका में निवेश कर रहे हैं और यहां उत्पादन इकाइयां स्थापित कर रहे हैं। इससे अमेरिकी निवेश को भी बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने स्वीकार किया कि महंगाई के कारण अमेरिकी नागरिक अभी भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी समझते हैं कि महंगाई और अन्य समस्याओं के कारण अमेरिकी लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन हम मानते हैं कि हमारी नीतियों से सकारात्मक परिणाम मिलने शुरू हो गए हैं।
पिछले सप्ताह अमेरिकी सीनेट ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' को 86-11 मतों से पारित कर दिया था। इस कानून के तहत रूसी तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों तथा प्रतिबंधों से बचने में शामिल पांच प्रमुख देशों के उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
हालांकि, इस विधेयक में भारत का नाम ऐसे किसी देश के रूप में स्वतः शामिल नहीं किया गया है, जिस पर अनिवार्य रूप से टैरिफ लगाया जाएगा।
अन्य खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें न्यू इंडिया अब्रॉड
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login