यह दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को दर्शाता है। / X/@IndiainSL
श्रीलंका में आयोजित होने वाले वार्षिक बौद्ध पुष्प अर्पण समारोह ‘पिच्चा मल पूजावा’ के अवसर पर भारत के उप उच्चायुक्त मैत्रेयी के ने अनुराधापुरा स्थित पवित्र जय श्री महा बोधि वृक्ष पर पुष्प अर्पित किए।
भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि जय श्री महा बोधि भारत और श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत के सबसे अनूठे प्रतीकों में से एक है। यह दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को दर्शाता है।
इस अवसर पर उप उच्चायुक्त ने वेन. ईथलावेतुनुवेवे ज्ञानतिलक थेरो से भी मुलाकात की, जो वर्तमान में अटमस्थानाधिपति के रूप में जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। बैठक के दौरान अनुराधापुरा पवित्र नगरी परिसर के विकास के लिए भारत सरकार की ओर से घोषित सहायता और आगे की कार्ययोजना को लेकर भी चर्चा की गई।
भारत और श्रीलंका के बीच बौद्ध धर्म, संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं के माध्यम से गहरे संबंध रहे हैं। अनुराधापुरा का जय श्री महा बोधि स्थल दोनों देशों के इस साझा आध्यात्मिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
वहीं, पिच्चा मल पूजावा की बात करें तो ये श्रीलंका के अनुराधापुर में होने वाला एक प्रसिद्ध बौद्ध धार्मिक उत्सव है, जहां भगवान बुद्ध को चमेली (पिच्चा) के फूल अर्पित किए जाते हैं। पूरा समारोह श्री महा बोधि और रुवानवेलि महा सेया के प्रांगण में आयोजित किया जाता है। भेंट स्वरूप हजारों बौद्ध श्रद्धालु चमेली के सफेद फूलों की मालाएं और फूल लाते हैं।
श्रीमहाबोधि डॉट ओआरजी पर दी गई जानकारी के अनुसार, अनुराधापुरा दुनिया के सबसे पुराने बसे शहरों में से एक है, और यह एक बौद्ध तीर्थ शहर और वर्ल्ड हेरिटेज प्रॉपर्टी है। यहीं महाबोधि वृक्ष है, जो उस बोधि पौधे की कलम से विकसित हुआ है, जिसे भारत से तीसरी शताब्दी (ईसा पूर्व) में सम्राट अशोक की पुत्री संघमित्रा महा थेरी श्रीलंका लेकर आई थीं, जिसके नीचे 2,500 वर्ष से अधिक समय पहले भगवान बुद्ध ने ज्ञान की प्राप्ति की थी।
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