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नोबेल की राह पर भारतीय मूल की माला मूर्ति, क्रांतिकारी खोज के लिए मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

इनके शोध ने यह समझने में मदद की है कि तंत्रिका तंत्र में सूचनाओं का प्रसंस्करण कैसे होता है।

 माला मूर्ति माला मूर्ति / pni.princeton.edu/

प्रिंसटन न्यूरोसाइंस इंस्टीट्यूट (PNI) की निदेशक और भारतीय मूल की प्रतिष्ठित प्रोफेसर माला मूर्ति को 24वें वार्षिक 'वाइली प्राइज इन बायोमेडिकल साइंसेज' से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान 'कनेक्टोम्स' यानी तंत्रिका कोशिकाओं को आपस में जोड़ने वाले जटिल वायरिंग आरेखों के पुनर्निर्माण और उनकी व्याख्या करने के लिए दिया गया है।

प्रोफेसर मूर्ति ने यह पुरस्कार सेबेस्टियन सेउंग, जॉन व्हाइट और जेराल्ड रुबिन के साथ साझा किया है। इन वैज्ञानिकों के शोध ने यह समझने में मदद की है कि तंत्रिका तंत्र में सूचनाओं का प्रसंस्करण कैसे होता है।

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दुनिया का पहला 'ब्रेन मैप' और उपलब्धि
प्रोफेसर माला मूर्ति, जो 2022 से PNI की निदेशक हैं, ने सेबेस्टियन सेउंग और अंतरराष्ट्रीय 'फ्लाईवायर' समुदाय के साथ मिलकर वर्ष 2024 में एक वयस्क फल मक्खी के पहले पूर्ण मस्तिष्क मानचित्र की घोषणा की थी। यह शोध न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम माना जाता है। पुरस्कार मिलने पर प्रोफेसर मूर्ति ने कहा, "मैं इस सम्मान से अत्यंत विनम्र महसूस कर रही हूँ। मेरे लिए सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इस उपलब्धि को इतनी जल्दी वैश्विक पहचान मिल गई।"

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