राजा कृष्णमूर्ति / NIA
कांग्रेस सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने 20 मई को 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी पर आयोजित हाउस इंटेलिजेंस कमेटी की सुनवाई के दौरान अमेरिका में बढ़ती इस्लामोफोबिया और यहूदी विरोधी घटनाओं पर चिंता जताई। यह बयान सैन डिएगो की एक मस्जिद में तीन लोगों की हत्या की घटना के कुछ दिनों बाद आया।
सुनवाई के दौरान कृष्णमूर्ति ने कहा कि 9/11 के दो दशक बाद भी अमेरिका में मुस्लिम विरोधी भावना खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि 9/11 के बीस साल से ज्यादा समय बाद भी अमेरिका में इस्लामोफोबिया खत्म नहीं हुआ है। इसी सप्ताहांत हमने सैन डिएगो की एक मस्जिद में तीन लोगों की भयावह हत्या देखी।
सुनवाई के दौरान कृष्णमूर्ति ने गवाहों से पूछा कि क्या वे इस बात से सहमत हैं कि अमेरिका में इस्लामोफोबिया और नफरत की कोई जगह नहीं है। सभी गवाहों ने इससे सहमति जताई। गवाहों में जमील जाफर भी शामिल थे जिन्होंने खुद को मुस्लिम बताया और कहा कि अमेरिका में यहूदी विरोधी और मुस्लिम विरोधी नफरत दोनों तेजी से बढ़ रही हैं।
जाफर ने कहा कि एक मुस्लिम होने के नाते मुझे इस्लामोफोबिया पसंद नहीं है। हमने अमेरिका में यहूदी विरोध और मुस्लिम विरोध दोनों में बढ़ोतरी देखी है। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग यहूदियों से नफरत करते हैं, वे मुसलमानों से भी उतनी ही नफरत करते हैं। हम एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने से ज्यादा साथ रहने पर मजबूत हैं।
कृष्णमूर्ति ने कुछ नेताओं की उस भाषा की भी आलोचना की जिसमें मुसलमानों को आतंकवाद से जोड़कर देखा जाता है और 'और ज्यादा इस्लामोफोबिया' की बात की जाती है। उन्होंने कहा कि नफरत की अमेरिका में कोई जगह नहीं है और यह हमारे मूल्यों के खिलाफ है।
इलिनॉय से डेमोक्रेट सांसद कृष्णमूर्ति ने एफबीआई के आतंकवाद विरोधी संसाधनों को आव्रजन कार्रवाई में लगाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा कमजोर हो सकती है।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि मुझे यह जानकर हैरानी हुई कि एफबीआई ने राष्ट्रपति के आव्रजन एजेंडे को समर्थन देने के लिए आतंकवाद विरोधी प्रयासों और जॉइंट टेररिज्म टास्क फोर्स जैसे संसाधनों को दूसरी तरफ मोड़ दिया।
उन्होंने सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के उपाध्यक्ष मार्क वॉर्नर द्वारा जुटाए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बड़े एफबीआई कार्यालयों में करीब 45 प्रतिशत एजेंटों को आतंकवाद और जासूसी से जुड़े कामों से हटाकर इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट की मदद में लगाया गया।
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह पूरी तरह गलत है। इससे देश कम सुरक्षित होता है। यह टिप्पणी 18 मई को सैन डिएगो के इस्लामिक सेंटर में हुई गोलीबारी के बाद आई। दो किशोर हमलावरों ने मस्जिद में फायरिंग की थी, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी।
मारे गए लोगों में मस्जिद का एक सुरक्षा गार्ड भी शामिल था, जिसने अंदर मौजूद नमाजियों और छात्रों को चेतावनी देकर बड़ी त्रासदी को रोकने में मदद की थी। जांचकर्ताओं ने कहा कि हमलावरों के पास से मिले दस्तावेजों में नस्लीय और धार्मिक नफरत से जुड़ी कट्टर सोच दिखाई दी।
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