मिथिला मखाना ने भरी वैश्विक उड़ान, पिछले दिनों बिहार से ऑस्ट्रेलिया भेजी गई 18 मीट्रिक टन की पहली समुद्री खेप। / Representational Image, (File Photo : IANS)
भारत का मखाना (फॉक्स नट) क्षेत्र आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार करने की राह पर है। केंद्र सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, बढ़ते उत्पादन, मजबूत घरेलू मांग, बेहतर कीमतों और निर्यात में वृद्धि के बल पर देश का मखाना बाजार वर्ष 2029-30 तक 11,000 से 12,000 करोड़ रुपए के आकार तक पहुंच सकता है।
फैक्टशीट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच मखाना उत्पादन में केवल 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन इस अवधि में इसकी औसत कीमत लगभग 500 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 1,250 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग, प्रीमियम ब्रांडिंग और सीमित आपूर्ति वृद्धि इसके प्रमुख कारण रहे हैं।
मखाना आज स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कम वसा, उच्च पोषण और पौध-आधारित खाद्य पदार्थों की ओर बढ़ते रुझान ने इसकी मांग को मजबूत किया है। इसी कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों बाजारों में इसकी खपत बढ़ रही है।
वर्ष 2024-25 में देश का कुल मखाना उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन रहा, जबकि औसत उत्पादकता 2.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। वहीं 2025-26 के द्वितीय अग्रिम अनुमान के अनुसार उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन तक पहुंचने की संभावना है और उत्पादकता बढ़कर 2.34 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर हो सकती है।
देश में मखाना उत्पादन के मामले में बिहार सबसे आगे है। वर्ष 2025-26 में राज्य का उत्पादन लगभग 60,000 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। बिहार में औसत उत्पादकता करीब 2 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है और यह राज्य राष्ट्रीय उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा प्रदान करता है।
पारंपरिक रूप से मखाने की खेती तालाबों और जलाशयों में की जाती रही है, लेकिन अब आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ी है। फील्ड सिस्टम खेती, स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर पैदावार मिल रही है। सरकार के अनुसार, खेती के दायरे में विस्तार, उत्पादकता में वृद्धि और खेती से जुड़े जोखिमों में कमी के कारण इस क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है।
भारत हर वर्ष 0.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक मखाने का उत्पादन करता है, जिसमें से लगभग 40 प्रतिशत, यानी करीब 23,000 से 25,000 मीट्रिक टन, का निर्यात किया जाता है, जबकि शेष उत्पादन घरेलू बाजार में खपत होता है।
वैश्विक स्तर पर क्लीन-लेबल और प्लांट-बेस्ड सुपरफूड्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत का मजबूत उत्पादन आधार मखाने को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रीमियम स्नैक के रूप में स्थापित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात के नए अवसर इस क्षेत्र की विकास दर को और तेज कर सकते हैं।
फैक्टशीट के अनुसार, घरेलू मखाना बाजार ने वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच 17 से 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है। मजबूत घरेलू मांग ने इस क्षेत्र को वैश्विक बाजारों के उतार-चढ़ाव से भी काफी हद तक सुरक्षित रखा है।
मखाना क्षेत्र के बढ़ते महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी। इसके अलावा, 2025-26 से 2030-31 की अवधि के लिए 476.03 करोड़ रुपए की लागत वाली मखाना विकास केंद्रीय क्षेत्र योजना को भी मंजूरी दी गई है।
इस योजना के तहत अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, किसानों के कौशल विकास, कटाई एवं कटाई-पश्चात प्रबंधन में सुधार, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
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