ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

पाकिस्तान में सिखों पर संगठित उत्पीड़न, लक्षित अपहरण और भेदभाव का सामना: रिपोर्ट

रिपोर्ट में कहा गया कि सिंह ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी, प्रांतीय और संघीय सरकारों, यहां तक कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर तक से गुहार लगाई।

 पाक में सिखों का उत्पीड़न पाक में सिखों का उत्पीड़न / © Sajjad/Xinhua/ZUMAPRESS.com

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान का संविधान भले ही धार्मिक अल्पसंख्यकों को समानता और सुरक्षा की गारंटी देता हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत “बार-बार किए गए विश्वासघात” को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए वास्तविक सुधार केवल बयानबाज़ी से आगे बढ़कर स्वतंत्र जांच, अदालतों के आदेशों के त्वरित क्रियान्वयन, पक्षपाती अधिकारियों की जवाबदेही और ईशनिंदा कानूनों या भीड़ हिंसा के दुरुपयोग से सुरक्षा सुनिश्चित करने से ही संभव है।

खालसा वॉक्स में प्रकाशित रिपोर्ट में पेशावर के सिख कारोबारी गुरविंदर सिंह का मामला सामने रखा गया है, जो पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति प्रणालीगत उपेक्षा और पक्षपात के एक चिंताजनक पैटर्न को उजागर करता है। सिंह के अनुसार, वर्ष 2022 से 2023 के बीच उनके तीन मुस्लिम साझेदारों जिनके साथ वह एक मोबाइल फोन शोरूम का संचालन करते थे, उनसे 7.5 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (लगभग 2.7 लाख अमेरिकी डॉलर) की धोखाधड़ी की।

यह भी पढ़ें- बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों को लेकर अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शन

गबन का पता चलने के बाद गुरविंदर सिंह ने पेशावर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। आरोपियों ने बाउंस चेक दिए और स्टांप पेपर पर लिखित आश्वासन भी दिए, लेकिन इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रायल कोर्ट, सेशंस कोर्ट और पेशावर हाईकोर्ट सहित कई अदालतों ने सिंह के पक्ष में फैसले सुनाए, फिर भी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और उनकी रकम अब तक वापस नहीं मिली है।

रिपोर्ट में कहा गया कि सिंह ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी, प्रांतीय और संघीय सरकारों, यहां तक कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर तक से गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई हस्तक्षेप नहीं हुआ। सिंह ने इस निष्क्रियता को सीधे तौर पर अपने सिख अल्पसंख्यक होने से जोड़ा और पाकिस्तानी अधिकारियों पर गैर-मुसलमानों के लिए न्याय को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया।

रिपोर्ट के अनुसार, यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि पाकिस्तान में सिख समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में लंबे समय से चली आ रही विफलताओं का हिस्सा है।

हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि सिख महिलाओं को लक्षित अपहरण, जबरन इस्लाम धर्मांतरण और मजबूरन विवाह का सामना करना पड़ा है। इसका उदाहरण 2019 में ननकाना साहिब की जगजीत कौर का मामला है, जिन्हें बंदूक की नोक पर अगवा किया गया, जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और एक मुस्लिम व्यक्ति से विवाह करा दिया गया। अंततः न्यायपालिका ने उनके अपहरणकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पगड़ी और दाढ़ी से पहचाने जाने वाले सिख पुरुषों को मौखिक और शारीरिक उत्पीड़न, लक्षित हत्याओं (जैसे 2023 में पेशावर और आसपास के इलाकों में दुकानदार दयाल सिंह और मनमोहन सिंह की गोली मारकर हत्या) का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, ईशनिंदा के आरोपों या भीड़ हिंसा की आड़ में जमीन और संपत्ति पर कब्ज़े के मामले भी सामने आते रहे हैं।

सिख गुरुद्वारों और अन्य अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों की उपेक्षा, तोड़फोड़ या हमलों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में 2020 में ननकाना साहिब स्थित गुरुद्वारा जन्मस्थान पर भीड़ द्वारा किए गए हमले का हवाला दिया गया है, जो एक धर्मांतरण विवाद के दौरान हुआ था।

न्यू इंडिया अब्रॉड की अन्य खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें।

Comments

Leave A Comment

Required fields are marked (*).

Related

Talk to us?