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‘आप सदन के निष्पक्ष संरक्षक हो’: राहुल गांधी ने संसद में स्पीकर को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई

स्पीकर को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने कहा, “संसदीय इतिहास में पहली बार सरकार के कहने पर लोकसभा अध्यक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया।

 भारतीय लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भारतीय लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी / IANS/Video Grab/Sansad TV

भारतीय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उन्हें “सदन का निष्पक्ष संरक्षक” होने की संवैधानिक जिम्मेदारी याद दिलाई। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर उन्हें लोकसभा में बोलने से रोका गया, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

स्पीकर को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने कहा, “संसदीय इतिहास में पहली बार सरकार के कहने पर लोकसभा अध्यक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया। यह हमारे लोकतंत्र पर एक धब्बा है, जिसके खिलाफ मैं अपना कड़ा विरोध दर्ज कराता हूं।”

राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान वर्ष 2020 के भारत-चीन सैन्य गतिरोध (लद्दाख) का मुद्दा उठाने को भी जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक अहम हिस्सा थी और इस पर संसद में चर्चा होना जरूरी है।

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नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में लिखा, “सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में यह आपकी संवैधानिक और संसदीय जिम्मेदारी है कि आप हर सदस्य, खासकर विपक्ष के सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करें। नेता प्रतिपक्ष और प्रत्येक सांसद को बोलने का अधिकार हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है।”

राहुल गांधी का यह पत्र ऐसे समय आया है, जब लोकसभा में भारी हंगामे के बीच कार्यवाही बाधित रही और अध्यक्ष की ओर कागज फेंकने तथा व्यवधान पैदा करने के आरोप में आधा दर्जन से अधिक विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया।

यह हंगामा उस समय हुआ, जब राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक से कुछ अंश पढ़ने की कोशिश की, जिनमें वर्ष 2020 के भारत-चीन सैन्य गतिरोध का जिक्र था। हालांकि उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी गई।

अपने पत्र में राहुल गांधी ने लिखा, “कल राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान आपने मुझे उस पत्रिका को प्रमाणित करने को कहा, जिसका मैं संदर्भ देना चाहता था। आज मैंने दोबारा बोलते समय उस दस्तावेज को प्रमाणित कर दिया।”

उन्होंने आगे कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार, यदि कोई सदस्य सदन में किसी दस्तावेज का हवाला देता है, तो उसे प्रमाणित करना और उसकी जिम्मेदारी लेना पर्याप्त होता है। इसके बाद सरकार का दायित्व होता है कि वह उस पर जवाब दे।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें आज लोकसभा में बोलने से रोकना न केवल स्थापित परंपराओं का उल्लंघन है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर नेता प्रतिपक्ष को जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है।

उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक प्रमुख हिस्सा थी और इस पर संसद में विस्तृत चर्चा होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है।

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