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ट्रम्प की टैरिफ रणनीति पर सुप्रीम कोर्ट का 'हथौड़ा', भारतीय कांग्रेस ने फैसले को बताया ऐतिहासिक

जयराम रमेश ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रम्प की पूरी टैरिफ रणनीति को खारिज करने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट को सलाम!

 भारतीय कांग्रेस के नेता जयराम रमेश भारतीय कांग्रेस के नेता जयराम रमेश / IANS/Qamar Sibtain

भारत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अधिकांश व्यापक टैरिफ को रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत किया है।

अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जयराम रमेश ने लिखा, “राष्ट्रपति ट्रम्प की पूरी टैरिफ रणनीति को खारिज करने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट को सलाम! उसकी वैचारिक संरचना को देखते हुए यह वाकई अद्भुत फैसला है। 6-3 का निर्णय स्पष्ट और निर्णायक है।”

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शुक्रवार को आया यह फैसला ट्रम्प के आर्थिक एजेंडे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। रूढ़िवादी झुकाव वाले न्यायालय ने एक अहम निर्णय में राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों पर लगाम लगाते हुए कहा कि 1977 के आपातकालीन कानून के तहत वे भारत सहित अमेरिका के व्यापारिक साझेदार देशों पर व्यापक आयात शुल्क लगाने के अधिकार से वंचित थे।

‘पॉलिटिको’ ने इस 6-3 के फैसले को ट्रम्प के आर्थिक कार्यक्रम के एक प्रमुख हिस्से की “बड़ी अस्वीकृति” बताया।

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की ओर से लिखते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने असीमित मात्रा, अवधि और दायरे में एकतरफा टैरिफ लगाने की असाधारण शक्ति का दावा किया, लेकिन ऐसा करने के लिए स्पष्ट संसदीय अनुमति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 1977 का कानून इस प्रकार की कार्रवाई के लिए पर्याप्त संसदीय स्वीकृति प्रदान नहीं करता।

अमेरिकी मीडिया के अनुसार, न्यायाधीशों ने माना कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत इतने व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त नहीं है।

‘द हिल’ ने टिप्पणी की कि अदालत ने ट्रम्प की व्यापक टैरिफ नीति के बड़े हिस्से को निरस्त करते हुए वैश्विक व्यापार व्यवस्था को आपातकालीन प्रावधानों के जरिये बदलने की कोशिश को अवैध करार दिया।

मुख्य न्यायाधीश रॉबर्ट्स ने स्पष्ट किया, “हम अर्थशास्त्र या विदेश नीति के मामलों में कोई विशेष विशेषज्ञता का दावा नहीं करते। हम केवल संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत हमें सौंपी गई सीमित भूमिका निभा रहे हैं। उसी भूमिका का निर्वहन करते हुए हम मानते हैं कि यह कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।”

इस फैसले को अमेरिका में कार्यपालिका और विधायिका के अधिकारों के बीच संतुलन की पुनर्पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।

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