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'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के लिए फायदेमंद रहेगी ट्रम्प 2.0 सरकार? ये चुनौतियां भी हैं

भारतीय स्टेट बैंक की अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024: भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ट्रम्प 2.0 का प्रभाव शीर्षक वाली रिपोर्ट में कई मुद्दों पर संभावित असर का आकलन किया गया है।

 ट्रम्प की नई सरकार में नीति परिवर्तन को लेकर कई तबकों में आशंकाएं गहरा गई हैं।  ट्रम्प की नई सरकार में नीति परिवर्तन को लेकर कई तबकों में आशंकाएं गहरा गई हैं। / facebook @Donald J. Trump

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की नई सरकार भारत खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल सकती है। हालांकि अर्थव्यवस्था के लिए कई चुनौतियां लेकर भी आ सकती है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक हालिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024: भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ट्रम्प 2.0 का प्रभाव शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ट्रम्प की आगामी नीतियां ग्लोबल कंपनियों के विदेशी विस्तार को सीमित करती हैं तो भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत योजना को फायदा हो सकता है और यह पहल घरेलू उत्पादन और विदेशी निवेश को बढ़ाना दे सकती हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरी संभावना है कि ट्रम्प की नीतियां अवैध आव्रजन व व्यापारिक प्रतिस्पर्धा पर सख्ती के साथ करों में कटौती, व्यापार संरक्षण, नौकरियों में वृद्धि और महंगाई नियंत्रित करने पर फोकस होंगी। एसबीआई विश्लेषकों का मानना है कि 'अमेरिका फर्स्ट' नीतियों में शुल्क बढ़ाने और आव्रजन नियमों में सख्ती होती है, तो ये भारत को आगे सुधार करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं और स्थानीय स्तर पर निवेश आकर्षित करने में मददगार साबित हो सकती हैं।

हालांकि नई सरकार की नई नीतियां भारत के लिए कुछ कठिनाइयां भी लेकर आ सकती हैं। अगर एच-1 बी वीजा की लिमिट घटाई जाती है तो भारतीय आईटी और आईटी सक्षम सेवा (आईटीईएस) कंपनियों के चिंता का सबब बन सकती हैं। ये कंपनियां लंबे समय से अमेरिका में अपने कुशल पेशेवरों को लाने के लिए इसी वीजा पर निर्भर हैं। एच-1बी वीजा में नए प्रतिबंधों से पेशेवरों की गतिशीलता में कमी आ सकती है जिससे अमेरिका में काम कर रही भारतीय आईटी कंपनियों की नियुक्ति क्षमता प्रभावित हो सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन चुनौतियों के बावजूद भारत में नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल सर्वेस और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) जारी रह सकता है। कुछ वैश्विक कंपनियां अगर विदेशों में अपने विस्तार की योजनाओं पर पुनर्विचार करती हैं, तब भी भारत पर इसका दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका कम ही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प की नीतियां कई तरह की चुनौतियां पेश कर सकती हैं लेकिन ये भारत को 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के जरिए घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को मजबूती देने का अवसर भी प्रदान कर सकती हैं। भारत घरेलू उत्पादन, आत्मनिर्भरता और आंतरिक निवेश में सुधार की प्रक्रिया तेज कर सकता है।

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