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सांसद सुब्रमण्यम ने कहा- ट्रम्प ने भारत-अमेरिकी संबंधों को 'पूरी तरह बिगाड़' दिया

सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि मौजूदा समय में रिश्तों में आई गिरावट की वजह व्यक्तिगत और नीतिगत मतभेद हैं।

 सुहास सुब्रमण्यम  सुहास सुब्रमण्यम / X Image

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। उनके अनुसार, दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच रिश्तों में आई यह कमजोरी दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा रही है। 

सुहास सुब्रमण्यम ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिका-भारत संबंधों को पूरी तरह से खराब कर दिया है। यह एक ऐसा प्रशासन था, जिसमें अपने पहले कार्यकाल में राष्ट्रपति ट्रम्प ने वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी के साथ संबंधों को मजबूत किया था।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में रिश्तों में आई गिरावट की वजह व्यक्तिगत और नीतिगत मतभेद हैं। सुब्रमण्यम के मुताबिक, अब प्रधानमंत्री मोदी को लेकर व्यक्तिगत कारणों के चलते ट्रम्प उन मजबूत आर्थिक संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जो कई वर्षों से बने हुए थे। इसका असर दोनों देशों पर पड़ रहा है।

सांसद ने चेतावनी दी कि हमारे और भारत के बीच संबंधों को खत्म करने या नुकसान पहुंचाने का कोई मतलब नहीं है। अगर अमेरिका के पास भारत के साथ संबंधों को मजबूत करके एक बड़ा अवसर है, तो हम वास्तव में अपनी आर्थिक शक्ति और आर्थिक प्रभाव को मजबूत कर सकते हैं। जब हम देखते हैं कि चीन के साथ क्या हो रहा है, तो भारत कई मायनों में हमारे लिए एक स्वाभाविक सहयोगी है। भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है।

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र, आर्थिक क्षेत्र और तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी और बढ़ाई जा सकती है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव को उन्होंने एक बड़ा अवसर बताया। उन्होंने विनिर्माण और औद्योगिक सहयोग का हवाला देते हुए कहा, "अगर कंपनियां चीन से निवेश निकालना चाहती हैं, तो भारत उस प्रयास में एक स्वाभाविक भागीदार है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्क (टैरिफ) इस संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनके मुताबिक, टैरिफ को लेकर ट्रंप प्रशासन की बयानबाजी ने भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि दोनों तरफ ऐसे कई लोग हैं जो आपसी मजबूत संबंधों के पक्ष में हैं। लेकिन जब आप मौजूदा ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के एक्शन देखते हैं, तो यह बहुत-बहुत मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने अमेरिका की विदेश नीति को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि ट्रंप प्रशासन ने युद्ध खत्म करने और आर्थिक रिश्ते मजबूत करने के जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं हुए। उल्टा हालात और खराब हो गए।

उनके अनुसार, टैरिफ और सहयोगी देशों से रिश्तों में आई दरार के कारण अमेरिका पर भरोसा कम हुआ है। कई देश अब अमेरिका पर पहले जैसा भरोसा नहीं कर रहे हैं। आगे की राह पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बीते एक साल में खराब हुए रिश्तों को सुधारने की जरूरत है, जिनमें भारत के साथ संबंध भी शामिल हैं।

हाल ही में पास हुए नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (एनडीएए) के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, तकनीक और लोगों के आपसी संपर्क लगातार बढ़े हैं। इसमें व्यापार, रक्षा खरीद और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग शामिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भारत-अमेरिका साझेदारी की अहम भूमिका है। ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय तक आई कमजोरी को लेकर अमेरिकी कांग्रेस की चिंता को बेहद गंभीर माना जा रहा है।

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। उनके अनुसार, दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच रिश्तों में आई यह कमजोरी दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा रही है। 

सुहास सुब्रमण्यम ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिका-भारत संबंधों को पूरी तरह से खराब कर दिया है। यह एक ऐसा प्रशासन था, जिसमें अपने पहले कार्यकाल में राष्ट्रपति ट्रम्प ने वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी के साथ संबंधों को मजबूत किया था।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में रिश्तों में आई गिरावट की वजह व्यक्तिगत और नीतिगत मतभेद हैं। सुब्रमण्यम के मुताबिक, अब प्रधानमंत्री मोदी को लेकर व्यक्तिगत कारणों के चलते ट्रम्प उन मजबूत आर्थिक संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जो कई वर्षों से बने हुए थे। इसका असर दोनों देशों पर पड़ रहा है।

सांसद ने चेतावनी दी कि हमारे और भारत के बीच संबंधों को खत्म करने या नुकसान पहुंचाने का कोई मतलब नहीं है। अगर अमेरिका के पास भारत के साथ संबंधों को मजबूत करके एक बड़ा अवसर है, तो हम वास्तव में अपनी आर्थिक शक्ति और आर्थिक प्रभाव को मजबूत कर सकते हैं। जब हम देखते हैं कि चीन के साथ क्या हो रहा है, तो भारत कई मायनों में हमारे लिए एक स्वाभाविक सहयोगी है। भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है।

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र, आर्थिक क्षेत्र और तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी और बढ़ाई जा सकती है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव को उन्होंने एक बड़ा अवसर बताया। उन्होंने विनिर्माण और औद्योगिक सहयोग का हवाला देते हुए कहा, "अगर कंपनियां चीन से निवेश निकालना चाहती हैं, तो भारत उस प्रयास में एक स्वाभाविक भागीदार है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्क (टैरिफ) इस संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनके मुताबिक, टैरिफ को लेकर ट्रंप प्रशासन की बयानबाजी ने भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि दोनों तरफ ऐसे कई लोग हैं जो आपसी मजबूत संबंधों के पक्ष में हैं। लेकिन जब आप मौजूदा ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के एक्शन देखते हैं, तो यह बहुत-बहुत मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने अमेरिका की विदेश नीति को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि ट्रंप प्रशासन ने युद्ध खत्म करने और आर्थिक रिश्ते मजबूत करने के जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं हुए। उल्टा हालात और खराब हो गए।

उनके अनुसार, टैरिफ और सहयोगी देशों से रिश्तों में आई दरार के कारण अमेरिका पर भरोसा कम हुआ है। कई देश अब अमेरिका पर पहले जैसा भरोसा नहीं कर रहे हैं। आगे की राह पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बीते एक साल में खराब हुए रिश्तों को सुधारने की जरूरत है, जिनमें भारत के साथ संबंध भी शामिल हैं।

हाल ही में पास हुए नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (एनडीएए) के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, तकनीक और लोगों के आपसी संपर्क लगातार बढ़े हैं। इसमें व्यापार, रक्षा खरीद और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग शामिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भारत-अमेरिका साझेदारी की अहम भूमिका है। ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय तक आई कमजोरी को लेकर अमेरिकी कांग्रेस की चिंता को बेहद गंभीर माना जा रहा है।

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