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ट्रम्प प्रशासन की तीसरे देशों में निर्वासन नीति को झटका, अदालत ने रोक बरकरार रखी

ह पूरा मामला होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के 30 मार्च के उस निर्देश को लेकर है जो 'तीसरे देशों में निर्वासन' से जुड़ा है।

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प / X/@WhiteHouse

ट्रम्प प्रशासन द्वारा अप्रवासियों को तीसरे देशों में तेजी से निर्वासित करने की नीति को बड़ा कानूनी झटका लगा है। बोस्टन स्थित यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फर्स्ट सर्किट ने सरकार की उस आपातकालीन याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी जो कुछ प्रवासियों को उनके गृह देश के अलावा अन्य देशों में निर्वासित करने पर रोक लगाता है।

25 फरवरी को तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सरकार की इस आपातकालीन मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा, "सरकार ने राहत के लिए आवश्यक मानकों को पूरा नहीं किया है, इसलिए 18 अप्रैल के प्रारंभिक निषेधाज्ञा पर रोक लगाने की आपातकालीन याचिका खारिज की जाती है।"

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पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासन यह साबित करने में विफल रहा कि उसे कानूनी परीक्षण में सफलता मिलने की प्रबल संभावना है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय (नकेन बनाम होल्डर) का हवाला देते हुए कहा कि राहत पाने के लिए यह जरूरी है कि याचिकाकर्ता यह साबित करे कि अपील में उसके पक्ष में फैसला आने की प्रबल संभावना है और उसे अपूरणीय क्षति हो रही है।

क्या है विवाद?
यह पूरा मामला होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के 30 मार्च के उस निर्देश को लेकर है जो 'तीसरे देशों में निर्वासन' से जुड़ा है। इस नीति के तहत अमेरिकी अधिकारी कुछ प्रवासियों को उनके मूल देश के अलावा किसी अन्य देश में निर्वासित करना चाहते थे, बशर्ते वह देश उन्हें स्वीकार करने को तैयार हो।

अदालत की चिंता
अदालत ने अपने आदेश में इस नीति के जारी रहने पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि "इस संदर्भ में गलत निर्वासन से अपूरणीय क्षति होगी।" यानी अगर किसी व्यक्ति को पूरी न्यायिक समीक्षा से पहले ही निर्वासित कर दिया गया, तो उसके परिणाम बेहद गंभीर और अपरिवर्तनीय होंगे।

अदालत ने दोनों पक्षों से कहा है कि वे अपने संक्षिप्त विवरण (ब्रीफ्स) में कुछ महत्वपूर्ण कानूनी सवालों का जवाब दें। इनमें यह शामिल है कि क्या यह वर्ग-व्यापी निषेधाज्ञा आप्रवासन और राष्ट्रीयता अधिनियम (इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट) के कुछ प्रावधानों को गलत तरीके से प्रतिबंधित कर रही है। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या अधिनियम का संबंधित खंड तीसरे देशों में निर्वासन का सामना कर रहे व्यक्तियों को व्यक्तिगत न्यायिक समीक्षा का अधिकार देता है।

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