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हिंद प्रशांत क्षेत्र में हथियारों की देरी को रोकने के लिए अमेरिकी विधेयक पेश

‘फर्स्ट आइलैंड चेन डेटरेंस एक्ट’ नामक यह विधेयक इस बात की विस्तृत समीक्षा की मांग करता है कि हथियारों की आपूर्ति में देरी से क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य तैयारियों पर क्या असर पड़ रहा है।

  सीनेटर माइकल बेनेट सीनेटर माइकल बेनेट / X/@MichaelBennet

दो अमेरिकी सीनेटरों ने इंडो-पैसिफिक (हिंद प्रशांत) क्षेत्र के प्रमुख साझेदारों को हथियारों की आपूर्ति में हो रही देरी की जांच के लिए एक द्विदलीय विधेयक पेश किया है।  ‘फर्स्ट आइलैंड चेन डेटरेंस एक्ट’ नामक यह विधेयक इस बात की विस्तृत समीक्षा की मांग करता है कि हथियारों की आपूर्ति में देरी से क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य तैयारियों पर क्या असर पड़ रहा है।

सीनेटर माइकल बेनेट और पेट रिकेट्स ने कहा कि हथियारों की बिक्री में लंबित ऑर्डर चीन के खिलाफ निरोधक क्षमता को कमजोर कर रहे हैं। बेनेट ने कहा कि हैरी ट्रुमन प्रशासन के समय से ही डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों सरकारों ने माना है कि फर्स्ट आइलैंड चेन की विश्वसनीय रक्षा एक स्थिर इंडो-पैसिफिक और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

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उन्होंने कहा कि हमारी प्रतिबद्धता उतनी ही मजबूत है जितनी हमारी अपने सहयोगियों और साझेदारों को हथियार देने की क्षमता। अभी देरी और लंबित ऑर्डर इस विश्वसनीयता को कमजोर कर रहे हैं।

रिकेट्स ने कहा कि क्षेत्रीय सहयोगी रक्षा खर्च बढ़ा रहे हैं लेकिन उन्हें हथियारों की आपूर्ति तेजी से चाहिए। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक में हमारे सहयोगी और साझेदार सामूहिक प्रयासों में ‘कम्युनिस्ट चीन’ की आक्रामकता को रोकने के लिए शक्ति-वर्धक (फोर्स मल्टीप्लायर) की तरह काम करते हैं। उनकी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उन्हें हमसे खरीदे गए हथियार जल्दी चाहिए।

यह विधेयक कंट्रोलर जनरल को 18 महीनों के भीतर जापान, ताइवान और फिलीपींस को अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति में देरी पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देता है। रिपोर्ट यह भी जांचेगी कि ये देरी पेंटागन की “फर्स्ट आइलैंड चेन में मजबूत ‘डिनायल डिफेंस’ बनाने, तैनात करने और बनाए रखने” की क्षमता को कैसे प्रभावित करती है।

फर्स्ट आइलैंड चेन जापान से ताइवान होते हुए फिलीपींस तक फैली हुई है और इसे पश्चिमी प्रशांत में एक महत्वपूर्ण रक्षा रेखा माना जाता है। विधेयक में उन हथियार सौदों का विवरण भी मांगा गया है जो स्वीकृत हो चुके हैं लेकिन अभी तक वितरित नहीं किए गए। इसमें पेंटागन की प्रक्रियाओं, उत्पादन सीमाओं और वैश्विक प्राथमिकताओं के कारण होने वाली देरी का विश्लेषण भी शामिल है।

विधायकों का कहना है कि ऐसी देरी सहयोगियों को अन्य आपूर्तिकर्ताओं की ओर मोड़ सकती है, जिससे संकट के समय समन्वय कमजोर हो सकता है। विधेयक “मजबूत डिनायल डिफेंस” को इस रूप में परिभाषित करता है कि विरोधी के लिए सफलता को इतना कठिन बना दिया जाए कि वह कार्रवाई ही न कर सके।

यह प्रस्ताव डोनल्ड ट्रंप प्रशासन की 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति के अनुरूप है, जिसमें फर्स्ट आइलैंड चेन के साथ मजबूत रक्षा व्यवस्था की बात कही गई है। बेनेट ने इंडो-पैसिफिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने के अन्य प्रयासों का भी समर्थन किया है, जिनमें एयूकेयूएस सहयोग का विस्तार और सहयोगियों के साथ अंतरिक्ष समन्वय बढ़ाना शामिल है।

हथियारों की आपूर्ति में देरी को लेकर चिंताएं ऐसे समय में बढ़ रही हैं जब अमेरिकी हथियारों की मांग बढ़ रही है। वैश्विक संघर्षों और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं के कारण रक्षा औद्योगिक आधार पर दबाव है।

जापान और फिलीपींस अमेरिका के संधि सहयोगी हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ताइवान संभावित चीन-अमेरिका संघर्ष की योजना में केंद्रीय भूमिका रखता है। भारत फर्स्ट आइलैंड चेन का हिस्सा नहीं है, लेकिन वह क्वाड के माध्यम से अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ इंडो-पैसिफिक में एक महत्वपूर्ण साझेदार है।

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