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अमेरिकी दूतावास की भारतीय छात्रों को चेतावनी- नियम तोड़े तो हो सकता है देश निकाला

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत में मौजूद अमेरिकी दूतावास ने कहा, अमेरिकी कानून तोड़ने पर आपके स्टूडेंट वीजा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

 सांकेतिक चित्र... सांकेतिक चित्र... / pexels

अमेरिका में भारतीय छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दरअसल, भारत में अमेरिकी दूतावास ने भारतीय छात्रों के लिए चेतावनी जारी की है। अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि अगर छात्रों ने नियमों का उल्लंघन किया तो उन्हें देश से निकाला जा सकता है। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत में मौजूद अमेरिकी दूतावास ने कहा, अमेरिकी कानून तोड़ने पर आपके स्टूडेंट वीजा पर गंभीर असर पड़ सकता है। अगर आपको गिरफ्तार किया जाता है या आप कोई कानून तोड़ते हैं, तो आपका वीजा कैंसल हो सकता है, आपको डिपोर्ट किया जा सकता है, और आप भविष्य में अमेरिकी वीजा के लिए अयोग्य हो सकते हैं। नियमों का पालन करें और अपनी यात्रा को खतरे में न डालें। अमेरिकी वीजा एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं।

बता दें, अमेरिका की तरफ से यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल 2025 में अमेरिकी वीजा नियम और प्रवासी नियम में बड़े बदलाव किए हैं।

इससे पहले अमेरिकी दूतावास ने एक्स पर ही अवैध प्रवासियों को लेकर चेतावनी जारी करते हुए कहा था, अवैध प्रवासी हिंसक कार्टेल, मानव तस्करों और भ्रष्ट अधिकारियों के टारगेट होते हैं। गैर-कानूनी प्रवासियों का शोषण किया जाता है और उन्हें शिकार बनाया जाता है, जो आखिर में एक बेकार सफर साबित होता है। अवैध प्रवासियों से सिर्फ तस्करों को ही फायदा होता है।

पिछले साल 30 दिसंबर 2025 को भी अमेरिकी एंबेसी ने कानून तोड़ने और आपराधिक सजा को लेकर कहा था कि अगर आप अमेरिका में कानून तोड़ते हैं, तो आपको भारी आपराधिक सजा दी जाएगी। ट्रंप सरकार अमेरिका में अवैध प्रवास को खत्म करने और हमारे देश की सीमाओं और हमारे नागरिकों की सुरक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में अमेरिका में पढ़ाई करने वाले लगभग 6000 विदेशी छात्रों का वीजा रद्द किया गया है। इसमें कई भारतीय छात्र भी शामिल थे। अमेरिका में तीन लाख के करीब विदेशी छात्र पढ़ाई करते हैं।

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकार से लाभ लेने वाले प्रवासी देशों की लिस्ट जारी की थी। इस लिस्ट में भारत का नाम शामिल नहीं था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर प्रवासी कल्याण पाने वालों की देश के हिसाब से रैंकिंग के आंकड़ों की एक लिस्ट साझा की है। इस लिस्ट में भारत का नाम ना होना कोई सामान्य बात नहीं है। यह अमेरिका के बड़े प्रवासी माहौल में भारतीय प्रवासियों की खास आर्थिक प्रोफाइल को दिखाता है।

ये आंकड़े दो टेबल में दिखाए गए हैं, जिन्हें मिलाकर एक सिंगल डेटासेट बनाया गया है। ये अमेरिका में सरकारी मदद पाने वाले प्रवासी परिवारों का हिस्सा दिखाते हैं। यह दर 80 फीसदी से ज्यादा से लेकर 40 फीसदी से थोड़ा कम तक है।

इस लिस्ट में सबसे ऊपर भूटान है, और भूटानी प्रवासियों का अमेरिकी सरकार से मदद पाने की दर 81.4 फीसदी है। इसके बाद यमन (उत्तर) 75.2 फीसदी, सोमालिया 71.9 फीसदी और मार्शल आइलैंड्स 71.4 फीसदी के साथ हैं। कई दूसरे देशों में भी कल्याणकारी भागीदारी का स्तर ऊंचा है।

इसके अलावा, लिस्ट के दूसरे पेज पर वे देश शामिल हैं जिनमें वेलफेयर में कम, लेकिन फिर भी उल्लेखनीय, भागीदारी है। आइवरी कोस्ट इस लिस्ट में 49.1 फीसदी के साथ सबसे आगे है, इसके बाद लाइबेरिया 48.9 फीसदी और अल्जीरिया 48.1 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर हैं।

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