किताब का कवर / Alfred A. Knopf
अल्फ्रेड ए. नॉफ (Alfred A. Knopf) 10 नवंबर को भारत में कांग्रेस पार्टी की नेता सोनिया गांधी की यादों पर आधारित किताब 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ़ लव' (Belonging: A Journey of Love) को हार्डकवर और ई-बुक के तौर पर पब्लिश करेगा। इसका ऑडियो संस्करण पेंगुइन रैंडम हाउस पब्लिश करेगा। नॉफ ने इसकी शुरुआती 1,00,000 कॉपियां छापने का ऐलान कर किया है।
इस किताब में गांधी के जीवन के कई पहलुओं को दिखाया गया है। जैसे युद्ध के बाद इटली में उनका बचपन, राजीव गांधी से उनकी शादी, गांधी परिवार के साथ उनके अनुभव, परिवार में हुए दुखद नुकसान और आखिर में भारतीय राजनीति में उनका आना।
पब्लिशर अल्फ्रेड ए. नॉफ की तरफ से जारी बयान में गांधी ने कहा कि दिल टूटने और नुकसान झेलने की वजह से ही मैं राजनीति की सार्वजनिक दुनिया में आई। उससे पहले तक मैंने अपनी निजता को बहुत संभालकर रखा था।
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गांधी ने कहा कि अपने जीवन के बारे में लिखना मेरे लिए आसान नहीं था। इसका मतलब था खुद को खोलना, उन पलों और अनुभवों को साझा करना जिन्हें मैंने हमेशा अपने मन में गहराई से छिपाकर रखा था।
544 पन्नों की यह किताब 1965 में इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से शुरू होती है, जब 19 साल की सोनिया माइनो को राजीव गांधी से प्यार हो गया। तीन साल बाद उनकी शादी हुई, जिससे युद्ध के बाद इटली के एक छोटे से शहर में बीते बचपन से भारत में जीवन की ओर उनका बदलाव शुरू हुआ।
इस किताब में इंदिरा गांधी से उनकी पहली मुलाकात और गांधी परिवार में जीवन के साथ तालमेल बिठाते हुए हिंदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय खान-पान को अपनाने की उनकी कोशिशों का जिक्र है।
गांधी ने कहा कि मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम कहानियां उनके इरादों, उनके कामों और यहां तक कि उनकी इंसानी कमियों की सच्चाई तक पहुंच पाई हैं। उन्होंने इस किताब को कई मायनों में उनकी 'इंसानीयत' को सम्मान देने वाला बताया।
इस किताब में राजीव गांधी के छोटे भाई संजय गांधी की मौत (जो एक प्लेन क्रैश में हुई थी) और इंदिरा गांधी की हत्या (जो 1984 में हुई थी) का भी जिक्र है। अपनी मां की मौत के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने और सात साल बाद चुनाव प्रचार के दौरान उनकी हत्या कर दी गई।
गांधी ने कहा कि राजनीति से दूर होने और अपनी जिंदगी पर सोचने के बाद, उन्हें अपनी जिंदगी में मौजूद "प्यार और वफादारी का धागा" और साफ तौर पर दिखाई देने लगा।
यह संस्मरण सालों तक राजनीति में आने के दबाव को ठुकराने के बाद उनके आखिरकार राजनीति में आने की कहानी बताता है। इसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष बनने तक के उनके सफ़र और 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद प्रधानमंत्री का पद ठुकराने के उनके फ़ैसले का भी जिक्र है।
गांधी ने कहा कि उनकी कहानी भारत में छह दशकों के दौरान देखे गए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों पर एक नजरिया पेश करती है; उन्होंने भारत को मेरा अपना खूबसूरत देश कहा।
नॉफ (Knopf) ने इस संस्मरण को गांधी की जिंदगी, प्यार और परिवार के साथ-साथ भारत के "आज़ादी के बाद के उथल-पुथल भरे इतिहास और मौजूदा राजनीतिक संघर्षों" का ब्योरा बताया है। इसमें देश के आर्थिक और सामाजिक बदलाव और पहचान, फर्ज और घर से जुड़े सवालों पर भी बात की गई है।
अल्फ्रेड ए. नॉफ़ के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, पब्लिशर और एडिटर-इन-चीफ़ जॉर्डन पावलिन ने कहा कि पब्लिशिंग हाउस इस संस्मरण को प्रकाशित करके सम्मानित महसूस कर रहा है। उन्होंने इसे गांधी की जिंदगी, हिम्मत, परिवार और इतिहास का ब्योरा बताया।
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