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USCIS ने 15 सितंबर से लागू होने वाले I-539 और I-765 फॉर्म अपडेट किए

USCIS ने आवेदकों को बदलाव के लिए तैयारी करने में मदद करने के लिए संशोधित फ़ॉर्म और उनके निर्देशों के प्रीव्यू संस्करण जारी किए हैं।

 सांकेतिक सांकेतिक / IANS

यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) 15 सितंबर को दो जरूरी फॉम के नए संस्करण जारी करेगा। इनमें नॉन-इमिग्रेंट स्टेटस को बढ़ाने या बदलने का आवेदन भी शामिल है। ये नए संस्करण एक नए संघीय नियम के मुताबिक होंगे, जो कुछ खास नॉन-इमिग्रेंट एकेडमिक छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और विदेशी सूचना मीडिया के प्रतिनिधियों के लिए एडमिशन की तय अवधि और रहने की अवधि बढ़ाने की नई प्रक्रिया तय करता है।

ये नए वर्जन, फॉर्म I-539 (नॉन-इमिग्रेंट स्टेटस बढ़ाने या बदलने का आवेदन) के मौजूदा 08/28/24 वर्जन और फॉर्म I-765 (रोजगार की मंजूरी के लिए आवेदन) के 08/21/25 वर्जन की जगह लेंगे।

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USCIS ने कहा कि इस बदलाव के लिए कोई ग्रेस पीरियड (छूट की अवधि) नहीं होगा, क्योंकि एजेंसी के लिए नए फाइनल नियम को लागू करने के लिए बदले हुए फॉर्म जरूरी हैं। इसलिए, आवेदकों को यह पक्का करना चाहिए कि वे अपना आवेदन जमा करने के समय के आधार पर सही वर्जन का इस्तेमाल करें।

USCIS ने 14 अगस्त को कहा कि 15 सितंबर, 2026 को, यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ फॉर्म I-539 (नॉन-इमिग्रेंट स्टेटस बढ़ाने/बदलने का आवेदन) और फॉर्म I-765 (रोजगार की मंजूरी के लिए आवेदन) के बदले हुए वर्जन जारी करेगा (दोनों के लिए वर्जन की तारीख: 09/15/26)।

एजेंसी ने कहा कि इन फॉर्म में बदलाव हाल ही में जारी उस फाइनल नियम के मुताबिक किया गया है, जो नॉन-इमिग्रेंट एकेडमिक छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और विदेशी सूचना मीडिया के प्रतिनिधियों के लिए एडमिशन की तय अवधि और रहने की अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया तय करता है।

USCIS ने आवेदकों को बदलाव के लिए तैयार होने में मदद करने के लिए दोनों बदले हुए फॉर्म और उनके निर्देशों के प्रीव्यू वर्जन जारी किए हैं। हालांकि, एजेंसी ने चेतावनी दी है कि नए 09/15/26 वर्जन को 15 सितंबर, 2026 से पहले फाइल नहीं किया जाना चाहिए।

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने हाल ही में एक नियम को अंतिम रूप दिया है, जो F-1 एकेडमिक छात्रों, J-1 एक्सचेंज विज़िटर्स और विदेशी सूचना मीडिया प्रतिनिधियों के लिए एडमिशन की तय अवधि और रहने की अवधि बढ़ाने की औपचारिक प्रक्रिया तय करता है।

नए नियम के तहत, कई प्रभावित लोगों को 'स्टेटस की अवधि' (D/S) के लिए एडमिशन के बजाय रहने की तय अवधि मिलेगी, जिससे कानूनी स्टेटस बनाए रखने के लिए रहने की अवधि बढ़ाने का आवेदन करना और भी ज़रूरी हो जाएगा। 

एरिक्सन इमिग्रेशन ग्रुप ने कहा कि इस बदलाव का असर F-1 वीजा वाले उन छात्रों पर पड़ सकता है जो अपने प्रवास की अवधि बढ़ाना चाहते हैं, साथ ही J-1 एक्सचेंज विजिटर्स, स्टेटस बदलने की अर्जी देने वाले आश्रितों, वर्क परमिट के लिए आवेदन करने वाले लोगों, विश्वविद्यालयों और एक्सचेंज प्रोग्राम स्पॉन्सर्स, और इमिग्रेशन मामलों के जानकारों व नियोक्ताओं पर भी इसका असर हो सकता है।

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