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कौन हैं एमएम कीरावणी, जिन्हें गणतंत्र दिवस पर वंदे मातरम् को नए रूप में पेश करने का मिला मौका?

इस ऐतिहासिक प्रस्तुति के लिए भारत के जाने-माने संगीतकार और ऑस्कर-विजेता एम.एम. कीरावणी को चुना गया है। उनका संगीत श्रोताओं के दिलों को छू जाता है।

 एमएम कीरावणी एमएम कीरावणी / IANS

साल 2026 का गणतंत्र दिवस खास होने जा रहा है। पूरे देश की निगाहें नई दिल्ली पर होंगी, जहां इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक भव्य परेड का आयोजन किया जाएगा। इस बार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर इसे नए स्वर और नए रूप में पेश किया जाएगा।  

इस ऐतिहासिक प्रस्तुति के लिए भारत के जाने-माने संगीतकार और ऑस्कर-विजेता एम.एम. कीरावणी को चुना गया है। उनका संगीत श्रोताओं के दिलों को छू जाता है।

एम.एम. कीरावणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स हैंडल पर लिखा, ''प्रिय साथियों, वंदे मातरम्! गीत 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ के शुभ अवसर पर, संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के लिए संगीत रचना करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है। यह भव्य प्रस्तुति देशभर से आए 2500 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जाएगी। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए जुड़े रहिए। आइए, वंदे मातरम् का उत्सव मनाएं।''

एम.एम. कीरावणी का जन्म 4 जुलाई 1961 को आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले के कोव्वुर में हुआ था। उनका पूरा नाम कोडुरी मारकथमणि कीरावणी है। उनका परिवार फिल्मी पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उनके पिता कोडुरी शिव शक्ति दत्ता गीतकार और पटकथा लेखक थे। एस.एस. राजामौली और एम.एम. श्रीलेखा उनके कजिन हैं।

उनके भाई म्यूजिक डायरेक्टर कल्याणी मलिक हैं। उनकी पत्नी एम.एम. श्रीवल्ली फिल्म प्रोड्यूसर हैं और उनके दोनों बेटे संगीत और अभिनय की दुनिया में काम कर रहे हैं। इस तरह उनका परिवार फिल्म और संगीत से जुड़ा हुआ है।

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कीरावणी ने 1987 में अपने करियर की शुरुआत सहायक संगीत निर्देशक के रूप में की। उन्होंने तेलुगु संगीतकार के. चक्रवर्ती और मलयालम संगीतकार सी. राजमणि के साथ काम किया। स्वतंत्र संगीतकार के रूप में उनको पहला मौका फिल्म 'कल्कि' (1990) से मिला, लेकिन यह फिल्म रिलीज नहीं हुई। उनकी किस्मत तब बदलती है जब 1991 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'क्षण क्षणम' रिलीज हुई। इस फिल्म के सारे गाने हिट साबित हुए और कीरावणी ने पूरे दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने लगातार साउथ फिल्मों के लिए गाने दिए, जो चार्टबस्टर बन गए।

कीरावणी का बॉलीवुड में डेब्यू 1994 में फिल्म 'क्रिमिनल' से हुआ। इसके बाद उन्होंने 'जख्म', 'साया', 'सुर', 'जिस्म' और 'पहेली' जैसी हिंदी फिल्मों में संगीत दिया। उनके गाने 'गली में आज चांद निकला', 'जादू है नशा है', और 'आवारापन बंजारापन' को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। हालांकि उनके संगीत को अंतरराष्ट्रीय पहचान 2022 में मिली, जब एस.एस. राजामौली की फिल्म 'आरआरआर' के गाने 'नाटू नाटू' ने गोल्डन ग्लोब और ऑस्कर अवॉर्ड जीतकर भारत का नाम दुनिया में चमकाया।

अपने करियर में कीरावणी को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें एक ऑस्कर अवॉर्ड, एक गोल्डन ग्लोब, दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, ग्यारह नंदी पुरस्कार और आठ फिल्मफेयर अवॉर्ड शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें भारत सरकार ने 2023 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया था।

एम.एम. कीरावणी का संगीत केवल धुन नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इस बार गणतंत्र दिवस पर 'वंदे मातरम्' को उनके स्वर में सुनना देश के लिए गर्व का पल होगा।

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